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- अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद पहुंचे परिजन,
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। करीब 25 साल बाद अपने गांव लौट रहे बुजुर्ग की मौत के बाद भी परिजन उनका शव लेने को राजी नहीं हो रहे थे। सोमवार को अमर उजाला में परिजनों की इस संवेदनहीनता की खबर प्रकाशित होने के बाद आखिरकार परिजन दोपहर को चीरघर पहुंचे। पुलिस ने पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया।
मूल रूप से मोंठ के लालनपुरा निवासी राकेश श्रीवास्तव (67) पुत्र प्रेम नारायण पिछले करीब 25 साल से छत्तीसगढ़ के चांपा में नौकरी कर रहे थे। उनके छोटे भाई अनिल श्रीवास्तव का कहना है छत्तीसगढ़ जाने के बाद राकेश ने परिवार से संबंध नहीं रखा। वह घर लौटकर भी नहीं आए। उन लोगों ने भी कभी संपर्क करने की कोशिश नहीं की। शनिवार को वह छत्तीसगढ़ से गांव वापस लौट रहे थे। झांसी स्टेशन पर तबीयत खराब होने पर उनकी मौत हो गई। रविवार दोपहर जीआरपी ने फोन करके परिजनों को राकेश की मौत के बारे में बताया।
जब उनसे शव लेने की बात कही तब परिजनों ने शव लेने से इन्कार कर दिया। उनका कहना है कि वह लोग दूर के रिश्तेदार हैं। राकेश की शादी नहीं हुई थी। पुलिस के दोबारा फोन करने पर उन लोगों ने फोन भी स्विच ऑफ कर लिया था।
अमर उजाला ने सोमवार के अंक में परिजनों की इस संवेदनहीनता की खबर प्रकाशित की। इसके बाद सोमवार दोपहर राकेश का छोटा भाई अनिल समेत गांव के अन्य लोग पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और राकेश के शव को अपने साथ ले गए। राकेश के भाई अनिल का कहना है कि राकेश की शादी नहीं हुई थी। वह भाइयों में तीसरे नंबर के थे। उनके बड़े भाई वीरेंद्र और अरविंद की पहले मौत हो चुकी। अनिल सबसे छोटे हैं जबकि उनकी छह बहनों में दो की मौत हो चुकी। वहीं राकेश के दोस्त मुरारी का कहना है राकेश से कुछ माह पहले फोन पर बात हुई थी। उसने बताया कि अब बचे हुए दिन वह घर पर और अपनों के बीच बिताना चाहता है लेकिन, उसकी आस अधूरी रह गई।