शहर के नालों पर अतिक्रमण को लेकर पांच साल तक लगातार सदन और कार्यकारिणी की बैठकों में खूब हंगामा होता रहा। तारीखें तय हुईं, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला और अतिक्रमण जस का तस है। इतना ही नहीं, वाहनोें की पार्किंग को लेकर शहर में कोई सुधार नहीं हो सका। पार्किंग के लिए प्लान तो खूब बने, लेकिन पार्किंग नहीं बनी।
शहर में छोटे-बड़े 204 नाले हैं, सभी पर अवैध कब्जे हैं। इस कारण उनकी सफाई नहीं हो पाती है और बरसात में ये नाले उफना जाते हैं, जिससे सड़कों पर जलभराव होता है। इस समस्या को दूर करने के लिए पार्षदों ने कई बार सदन में उठाया, लेकिन हर बार आश्वासन मिला। नतीजा कुछ नहीं निकला। मेहंदी बाग में जलभराव पांच पहले होता था और अभी भी हो रहा है। बरसात में जलभराव की समस्या से छुटकारा दिलाने के लिए अफसरों ने निरीक्षण किए, आश्वासन दिए परंतु नतीजा कुछ नहीं निकला। नटवली नाला, नंदनपुरा नाला, छनियापुरा का नाला, मलगढ़ा के नाला से आसपास होने वाले जलभराव की समस्या जस की तस है। पार्षदों ने इस पर सदन की बैठकों में खूब हंगामे किए।
शहर में पार्किंग की बड़ी समस्या है। जहां देखो सड़क पर गाड़ियां पार्क कर दी जा रही हैं, पांच साल में इसका समाधान नहीं निकल सका। सीपरी बाजार में नगर निगम की सब्जी मार्केट में अंडरग्राउंड पार्किंग बनाने के प्रस्ताव पर पांच साल तक सहमति नहीं बन सकी। इसके अलावा रानी महल के सामने तीन मंजिला पार्किंग बनाने और नगर निगम कैंपस में कर्मचारियों के आवास तोड़कर पार्किंग बनाने के प्रस्ताव पर काम नहीं हो सका। हालांकि, अब स्मार्ट सिटी बन जाने के बाद पार्किंग स्थलों पर काम होने की उम्मीद है।
शहर की स्ट्रीट लाइट में सुधार हुआ। पहले छह हजार खंभे थे और करीब चार हजार पर लाइट जलती थी, लेकिन धीरे-धीरे कर करीब आठ हजार स्ट्रीट लाइट लगाकर खंभे रोशन किए गए। पहले दिन में स्ट्रीट लाइट जलती थी, बाद में टाइमर लगवाए गए और लाइट आटोमेटिक बंद होनी शुरू हो गई।
सुभाषगंज में नगर निगम की 115 दुकानें हैं। इन दुकानों को नए सिरे से बनवाने की कोशिश शुरू हुई, लेकिन बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इससे सुभाष गंज मार्केट का आधुनिकीकरण नहीं हो सका। इसके अलावा इलाइट चौराहा पर विभागीय मार्केट को दो मंजिला नहीं बनाया जा सका, यदि दो मंजिला हो जाती तो नगर निगम की आमदनी बढ़ जाती और मार्केट से लोगों को रोजगार मिलता।
शहर की सफाई व्यवस्था में पांच साल में जरूर सुधार हुआ है। पहले कचरा एक-एक सप्ताह तक नहीं उठाया जाता था, लेकिन अब नियमित उठाया जा रहा है। नालियाें की सफाई और सड़कों की सफाई हो रही है। अब तो बड़ा बाजार में रात में मार्केट के बाहर सफाई हो रही है, ताकि दुकान खुलने के दौरान मार्केट में कचरा न रहे। डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन हो रहा है।
बड़ी सड़कें बनी
नगर निगम को तेरहवें वित्त से जो पैसा मिलता था, उसका उपयोग नालों के निर्माण पर किया जाता था। केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद 14 वें वित्त आयोग से मिले पैसे से सड़कों का निर्माण किया गया। इसमें कुछ ऐसी सड़कें भी बन गईं, जो दस साल से खस्ताहाल पड़ी थीं। इनमें प्रमुख रूप से नगरा हाट के मैदान की सड़क, किला मार्ग की सड़क, नारायण बाग तिराहा से अंजनी माता मंदिर की सड़क और लक्ष्मीगेट से गल्ला मंडी तक की सड़क शामिल हैं।
चौराहे संवरे
पांच साल में शहर के चौराहों का स्वरूप बदल गया। इसमें इलाइट चौराहा, गुलाम गौस खां मिनर्वा चौराहा, कर्माबाई चौराहा, अहिल्याबाई तिराहा, नेताजी सुभाष चौराहा समेत ज्यादातर चौराहों का कायाकल्प करा दिया गया।
होनी थी 30, हुईं 18 बैठकें
सदन की बैठकें नियमानुसार नहीं होने के कारण पार्षदों और महापौर के बीच विरोध रहा है। नियमानुसार एक साल में छह बैठकें होनी चाहिए। इस हिसाब से पांच साल में तीस बैठकें होनी चाहिए, लेकिन बैठकें सिर्फ 18 हो सकीं। पार्षद बराबर सदन की बैठक बुलाने की मांग करते रहे हैं।
पार्किंग का प्रस्ताव शासन को भेजा
पार्किंग की समस्या के समाधान के लिए उन्होंने रानी महल के सामने नगर विकास मंत्री को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के आधार पर पार्किंग बनाने का प्रस्ताव भेजा है। उम्मीद है पास हो जाएगा। नगर निगम में कर्मचारियों के आवास तोड़कर पार्किंग बनाई जाएगी, ऊपर आवास बनेंगे। इस पर जल्द काम शुरू होने वाला है।
- किरन वर्मा
महापौर