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Jhansi News: चांद के दीदार के साथ ही मोमिनों के लिए खुलेगा ‘तौबा’ का दरवाजा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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झांसी। वैसे तो रमजान का पूरा महीना ही मोमिनों के लिए रहमत, बरकत और अजमताें का महीना कहा जाता है। इस पाक महीने की शुरूआत होते ही जहन्नुम का दरवाजा बंद कर जन्नत का दरवाजा खोल दिया जाता है। इबादतों में किसी तरह की कमी नहीं हो इसके लिए पाक परवरदिगार ने इस महीने को तीन भागों (अशरा) में बांट दिया है। रमजान के पहले अशरे को रहमत, दूसरे को मगफिरत और तीसरा अशरा जहन्नुम से आजादी का होता है।
चांद के दीदार के साथ ही 12 अथवा 13 मार्च को इबादतों का माह मुकद्दस रमजान का आगाज होगा। इस पाक महीने में अल्लाह की रहमतें नाजिल होती हैं। इसी पाक महीने में सवाब का दर्जा सत्तर गुना अधिक होता है। जिसके चलते मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखकर परबरदिगार की इबादत में झुक जाते हैं। इस्लाम के मुताबिक रमजान के महीनों को दस-दस दिन तीन अशरों में बांटा गया है। पहले रोजे से दसवें रोजे तक पहला अशरा होता है। जिसे रहमत का अशरा कहा जाता है। वहीं ग्यारहवें रोजे से बीसवें रोजे तक रमजान का दूसरा अशरा कहा जाता है। इस अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगते हुए मगफिरत की दुआ करते हैं। आखिरी अशरा जहन्नुम से आजादी का होता है। रमजान के चांद के साथ ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो जाती है। मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि वैसे तो रमजान का हर लम्हा बड़ा ही बेशकीमती होता है। ज्यादा से ज्यादा इबादतों के लिए रमजान के महीने को तीन अशरों में बांटा गया है। हर अशरे का अलग ही महत्व है। इस माह में अधिक से अधिक तौबा कर अपने गुनाहों की माफी मांगे।
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ईदगाह में सवा आठ बजे से शुरू होगी तरावीह की नमाज

झांसी। रमजान का चांद नजर आते ही तरावीह (रमजान में पढ़ी जाने वाली विशेष नमाज) की शुरूआत होगी। पठोरिया स्थित ईदगाह में आठ दिन की तरावीह होगी। वहीं जीवनशाह स्थित मस्जिद शहीदेन में दस दिन की तरावीह की नमाज अदा होगी। दोनों जगहों पर सवा आठ बजे से नमाज शुरू होगी।
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