झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार की सीमा ही पार हो गई है। संबद्धता के नाम पर ली गई फीस में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। फर्जी रसीदों का इस्तेमाल कर कॉलेजों को रेवड़ियों की तरह संबद्धता दे दी गई है। यह घोटाला लाखों रुपयों का बताया जा रहा है।
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्धता लेने के पहले कॉलेज को विभिन्न चरणों से गुजरना पड़ता है। कॉलेज को पंजीकरण शुल्क, विश्वविद्यालय की टीम का कॉलेज में निरीक्षण करने पर शुल्क, विषयवार संबद्धता लेने पर शुल्क देना पड़ता है। बीए, बीएससी, बीकॉम विषय के लिए निरीक्षण शुल्क चालीस हजार रुपये है। किसी भी विषय का संबद्धता शुल्क प्रथम वर्ष के लिए 75 हजार और द्वितीय, तृतीय विषय के लिए चालीस-चालीस हजार निर्धारित है।
सूत्रों के मुताबिक संबद्धता विभाग से जुड़े कर्मचारियों ने कॉलेजों को तय शुल्क की रसीद थमाकर संबद्धता तो दे दी, लेकिन इसमें से चंद हजार रुपये ही विश्वविद्यालय के खाते में जमा हुए। यही नहीं, एक ही रसीद पर विभिन्न विषयों की संबद्धता दे दी गई। वित्त विभाग ने जब ऑनलाइन वेरिफिकेशन किया तब यह घपला पकड़ में आ गया। हाल ही में बुंदेलखंड के विभिन्न जनपदों के ऐसे आठ मामले प्रकाश में आए हैं, जिसमें संबद्धता शुल्क के नाम पर फर्जीवाड़ा किया गया है। शक की सुई संबद्धता विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों पर झूल रही है। लाखों रुपये का बताया जा रहा यह फर्जीवाड़ा प्रकाश में आने के बाद विश्वविद्यालय के अधिकारी भी हतप्रभ रह गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामला संज्ञान में आने के बाद जांच के आदेश दे दिए हैं।
पांच वर्ष की पत्रावलियों की होगी जांच
कुलपति ने प्रथम चरण में मार्च 2016 से विगत पांच वर्षों की संबद्धता पत्रावलियों की जांच के निर्देश दिए हैं। वीसी द्वारा जारी किए गए आदेश में स्पष्ट है कि निर्धारित पंजीकरण शुल्क, निरीक्षण शुल्क, विषयवार संबद्धता शुल्क जमा न होने का प्रकरण प्रकाश में आया है। इस प्रकार की गंभीर वित्तीय अनियमितता रोकने हेतु वित्त विभाग द्वारा पत्रावलियों की जांच विगत बैंक समाधान विवरणों से की जाएगी। इसके लिए वित्त विभाग को पांच सालों की पत्रावलियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
निरीक्षण में गलत रिपोर्ट के लगते रहे आरोप
संबद्धता के लिए आवेदन करने वाले कॉलेज में निरीक्षण को जाने वाले विश्वविद्यालयों की टीमों पर गलत रिपोर्ट देने के भी आरोप पूर्व में लगते रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि बीयू का निरीक्षण दल कॉलेजों से सेटिंग कर प्रबंधकों की मनचाही रिपोर्ट जमा कर देता है। ऐसा करने से दल के सदस्यों की जहां जेबें गर्म हो जाती हैं, वहीं कॉलेज को मानक पूरे न होने के बावजूद संबद्धता। बताया गया कि यदि मानकों के अनुरूप जांच करा ली जाए तो हाल ही के वर्षों में संबद्धता पाए कई कॉलेज कसौटी पर खरे नहीं उतर सकेंगे।
‘जिन कॉलेजों के संबद्धता शुल्क में अनियमितताओं के आरोप हैं, वहां के प्रबंधकों को मुकदमा दर्ज कराने को कहा गया है। जांच चल रही है। जांच के बाद हकीकत सामने आ जाएगी।’
- व्यास नारायण सिंह, कुलसचिव