नगर की सुरक्षा दीवार आज पूरी तरह से भेदी जा चुकी है। वह वक्त दूर नहीं
जब नगर परकोटा सिर्फ इतिहास के पन्नों में दिखेगा। लोगों व सरकारी संस्थाओं
ने मनमानी तरीके से दीवार तोड़कर निर्माण कर लिए हैं। नगर निर्माण के
प्रारंभिक दौर में मराठा राज्य की राजधानी झांसी की सुरक्षा के लिए चारों
ओर मजबूत परकोटा बनाया गया था। दस मुख्य द्वार व नौ लघुद्वार (खिड़की) वाले
इस परकोटे की विशेषता रही कि इसकी दीवार को शत्रु कभी भेद नहीं पाए। लेकिन
लोगों की मनमानी के चलते महारानी लक्ष्मीबाई के क्रांतिपथ का अहम हिस्सा
अतिक्रमण की चपेट में है। भांडेरी गेट में विद्युत विभाग के अधिकारियों ने
मनमानी कर गेट पर ट्रांसफार्मर लगाकर अवैध कब्जा कर लिया है। वहीं कु छ
लोगों ने दीवार काटकर निर्माण करा लिए हैं।
इसी प्रकार सूजे खां खिड़की
से लगी परकोटे की दीवार को नगर निगम प्रशासन ने तोड़कर सार्वजनिक शौचालय
बनवा दिया है। इसी प्रकार उन्नाव गेट के परकोटा का एक हिस्सा अतिक्रमण के
चलते क्षतिग्रस्त हो चुका है। स्ट्रीट लाइट के लिए लगे खंभे व लोगों के
आवासों ने दीवार को लगभग भेद दिया। बड़ागांव गेट, दतिया गेट, अलीगोल
खिड़की, खंडेराव गेट, पंचकुइयां क्षेत्र की दीवार को काटकर लोगों ने आवास,
दुकान व अन्य निर्माण कर लिए हैं, जिससे दीवार के लुप्त होने का खतरा बढ़
गया है। ऐतिहासिक द्वार गनपत खिड़की के पास सफाई न होने से स्थिति और भी
दयनीय हो गई है।