फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi News: साइबर ठगी का ‘कारोबार मॉडल’, सबके तय थे अलग-अलग काम

Sun, 09 Aug 2026 02:36 AM IST
झांसी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झांसी
विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। कटेरा के तीन गांवों में चल रहा साइबर ठगी का नेटवर्क बाकायदा कारोबार मॉडल की तरह संचालित हो रहा था। इसमें डेटा जुटाने से लेकर मोबाइल नंबर उपलब्ध कराने, कॉल करने, पीड़ितों को डराने-धमकाने, खातों में रकम मंगाने और पैसे निकालने तक के लिए अलग-अलग लोग काम करते थे। हर व्यक्ति की भूमिका तय थी और ठगी की रकम भी निर्धारित दर के हिसाब से बांटी जाती थी।
विज्ञापन

छानबीन में शामिल पुलिस अफसरों के मुताबिक, गांवों में सक्रिय अलग-अलग गिरोहों के बीच छह लोग पूरे नेटवर्क की कमान संभाल रहे थे। इनमें लक्ष्मण, सत्यम यादव उर्फ शिवम, राजू, नीतिश यादव, धीरेंद्र यादव और बृजेंद्र यादव शामिल हैं। पुलिस ने सभी को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक, लक्ष्मण और सत्यम उर्फ शिवम नेटवर्क के सबसे शातिर सदस्य थे।
डेटा जुटाने के बाद ठगी की शुरुआत फोन कॉल से होती थी। सत्यम खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को डराता-धमकाता था। वह सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का नाम लेकर गिरफ्तारी की धमकी देता था। कई मामलों में वीडियो कॉल भी करता था। खास बात यह थी कि गिरोह एक बार में बहुत बड़ी रकम नहीं मांगता था। आमतौर पर 10 से 50 हजार रुपये तक की रकम वसूली जाती थी। कम रकम मांगने के कारण एक दिन में कई लोगों को निशाना बनाया जाता था।
विज्ञापन

पीड़ितों से ठगी गई रकम गांव के लोगों के खातों में मंगाई जाती थी। इसके बाद राजू, नीतिश और धीरेंद्र रकम निकालने का काम करते थे। बाद में पूरी रकम गिरोह के सदस्यों के बीच उनकी तय भूमिका और रेट के हिसाब से बांट दी जाती थी।

घर के एक कमरे को बना दिया था थाना
शातिर जालसाजों ने काडौर स्थित आदिवासी कॉलोनी में एक मकान किराये पर लिया था। पुलिस जब वहां पहुंची तो एक कमरे को थाने की तरह सजा रखा था। कमरे में आलमारियों के अंदर फाइलें रखी थीं और पुलिस जैसी रंग की परदे लगाए गए थे। वहां सायरन और पुलिस थाने जैसा ढांचा भी बनाया गया था।
पुलिस के मुताबिक, इस कमरे का इस्तेमाल सत्यम उर्फ शिवम करता था। वीडियो कॉल के दौरान पीड़ितों को डराने के लिए पुलिस थाने का माहौल बनाया जाता था और सायरन की आवाज का इस्तेमाल किया जाता था। तलाशी के दौरान पुलिस की वर्दी भी बरामद हुई है।

ऑनलाइन माध्यमों से खरीदते थे डेटा
पुलिस के मुताबिक, गिरोह साइबर ठगी के लिए डेटा भी ऑनलाइन माध्यमों से जुटाता था। पूछताछ में पता चला कि थानों में दर्ज एफआईआर से पीड़ित और आरोपी पक्ष के मोबाइल नंबर हासिल किए जाते थे। इसके बाद दोनों पक्षों से संपर्क किया जाता था। पीड़ित पक्ष को मदद या फायदा दिलाने का झांसा देकर रकम मांगी जाती थी, जबकि आरोपी पक्ष को जांच और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उगाही की जाती थी। पुलिस के अनुसार, गिरोह के पास बड़ी मात्रा में डेटा डार्क वेब समेत ऑनलाइन माध्यमों से खरीदा हुआ भी था।

शहरी थानों से बुलाया गया पुलिस बल
कार्रवाई को गोपनीय रखने के लिए शहरी क्षेत्र के थानों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था। अभियान में शामिल पुलिसकर्मियों को भी कार्रवाई की पूरी जानकारी पहले से नहीं दी गई थी। तड़के कई वाहनों से पुलिस की टीमें अचानक तीनों गांवों में पहुंचीं और उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। इसके बाद एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया गया। पुलिस के अचानक पहुंचने से गांवों में खलबली मच गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें