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रेल मंडल में 791 पुल पूरी कर चुके हैं औसत आयु

Thu, 06 Aug 2015 12:36 AM IST
झांसी / ब्यूरो
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पश्चिम रेल के हरदा खंडवा खंड में खिरकिया और भिरंगी स्टेशन के मध्य मंगलवार की रात हुए हादसे ने पुराने पुलों के रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। झांसी रेल मंडल में करीब आठ सौ पुल सौ साल पुराने होने के बाद भी ट्रेनों का भार उठाए हुए हैं। ऐसे में विभिन्न रेलवे रूटों को जोड़ने वाले इन पुलों के रखरखाव की आवश्यकता बढ़ गई है। हालांकि, इंजीनियरिंग विभाग द्वारा पुलों की बराबर जांच की जाती है।
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रेल मंडल में छोटे- बड़े पुलों की संख्या 2,488 है। इनमें 791 पुल सौ साल पुराने हो चुके हैं। इनमें बीना- आगरा कैंट रेल लाइन पर 309 पुल, झांसी- कानपुर रेल लाइन पर सात पुल, झांसी- मानिकपुर रेल लाइन पर 303, एट- कोंच रेल लाइन पर नौ, धौलपुर छोटी लाइन पर 46 व ग्वालियर- श्योपुर कलां छोटी लाइन पर  117 पुल शामिल हैं।
आमतौर पर एक पुल की अधिकतम आयु सौ साल  मानी जाती है। ऐसे में अपनी उम्र पूरी कर चुके इन पुलों के दुबारा निर्माण की जरूरत महसूस की जाने लगी है। हालांकि, रेलवे का इंजीनियरिंग विभाग पुलों की गुणवत्ता की समय-समय पर जांच करता रहता है। एक रेल अधिकारी के अनुसार पुलों के बेस की जांच मशीनों से कराई जाती है। आवश्यकता होने पर इनकी मरम्मत कर दी जाती है।
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समिति ने तय कर रखी है पुलों की आयु
रेलवे बोर्ड द्वारा गठित समिति ने रेलवे संपत्तियों की औसत उम्र निर्धारित की है। बड़े पुलों की औसत आयु 40 से 100 साल मानी गई है। इसके अलावा स्टील वर्क्स के ब्र्रिज की 60 साल, मेसोनरी ब्रिज की 100, स्ट्रक्चर स्टील ब्रिज की 60, मेसोनरी एंड सीमेंट कंक्रीट की 65, आरसीसी ब्रिज की 60 व कंक्रीट ब्रिज की औसत उम्र चालीस साल तय की गई है।
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