झांसी। कोर्ट में विचाराधीन प्रकरण में शासन को जवाब भेजने में देरी होने पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डिस्पैच बाबू को निलंबित कर दिया है। इस प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी के खिलाफ शासन ने कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक विभाग में बैच 2021-22 के लिए डिप्लोमा की सीटों पर तीन छात्रों का आवंटन नेशनल मेडिकल काउंसिल की ओर से किया गया था। लगभग दो सप्ताह बाद ये सीटें एनएमसी द्वारा मेडिकल सर्जरी यानी एमएस में तब्दील कर दी गईं। ऐसे में दो छात्रों ने कोर्ट में केस कर दिया कि उन्हें भी डिप्लोमा की जगह एमएस करने की अनुमति दी जाए। इस मामले में चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों से लेकर कॉलेज प्रशासन तक को पार्टी बनाया गया। इस मामले में 13 अप्रैल को कोर्ट में तारीख लगी हुई थी। चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से कॉलेज प्रशासन से जवाब मांगा गया था। शासन का पत्र मेडिकल काॅलेज प्राचार्य के पास 11 अप्रैल को पहुंचा। उन्होंने डिस्पैच बाबू को पत्र भेज दिया। यहां से पत्र स्टूडेंट सेक्शन और लीगल सेल के पास जाना था। प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर ने बताया कि डिस्पैच बाबू अंकित कुमार ने ये पत्र अगले दिन यानी 12 अप्रैल को दोपहर 12 बजे लीगल सेल के पास भेजा। वहीं, स्टूडेंट सेक्शन के पास शाम साढ़े चार बजे पत्र पहुंचा। इस वजह से शासन को समय से जवाब नहीं भेजा जा सका। इस प्रकरण में लापरवाही बरतने पर डिस्पैच बाबू को निलंबित कर दिया गया है।