अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प ‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत बुधवार नाटक ‘गुमराह’ का मंचन हुआ, जिसके जरिये कश्मीर के भटके युवाओं को दर्शाया गया। बताया गया कि उन्हें किस तरह से बरगला कर आतंकी बना दिया जाता है। इस दौरान सभी ने नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ ली।
बुंदेलखंड नाट्य कला एकेडमी के थिएटर कलाकारों ने ‘गुमराह’ में बताया कि किस प्रकार से शिक्षा ग्रहण करने वाले या फिर नौकरी तलाशने वाले युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें प्रलोभन देकर देश के खिलाफ खड़ा कर आतंकी बनाया जाता है। नाटक में अमजद और असलम दो छात्र हैं, जिन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी नहीं मिल पाती है। वे किसी तरह आतंकियों के सरदार के पास पहुंचते हैं। वहां दोनों को देश के खिलाफ खड़ा किया जाता है। दोनों आतंक के क्षेत्र में उतरकर कई परिवारों की जान ले लेते हैं। बाद में अमजद तो संभल जाता है, परंतु असलम आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहता है। एक दिन गांव वालों पर गोलियां चलाते वक्त एक गोली उसके भतीजे को लग जाती है। तब उसे एहसास होता है कि वह गलत रास्ते पर चल पड़ा था। उसके बाद से वह आतंक का रास्ता छोड़ देता है।
नाटक में सरदार का अभिनय तरुण ने, अमजद का किरदार अमित, असलम का हिमांशु, हामिद का आकाश और सलीम का किरदार नवल ने अदा किया। निर्देशन महेंद्र वर्मा का रहा। वहीं, मुंशी प्रेमचंद की कथा बड़े भाई साहब का भी मंचन हुआ, जिसका निर्देशन डॉ. कृपांशु और मार्गदर्शन डॉ. हिमांशु ने किया। इस मौके पर नीति शास्त्री, सोम शर्मा, जितेंद्र शर्मा, कृष्णा कौशिक मौजूद रहीं।
नाटक के जरिए सुलगते कश्मीर की सच्चाई से रूबरू कराया गया है। यह सच है कि वहां के युवाओं को भटका कर उन्हें गलत रास्ते पर ले जाया जा रहा है। - नीता विश्वकर्मा।
कश्मीर में नौजवानों को शिक्षा के बजाय उन्हें आतंक के रास्ते पर भेजने का जो काम हो रहा वह गलत है। उस पर रोक लगनी चाहिये। तभी कश्मीर में अमन लौटेगा। - चित्रा वर्मा।
पुलवामा की घटना के बाद सेना ने आतंक के खिलाफ कठोर कदम उठाया है। इससे आतंकियों के हौसले पस्त हुए हैं। उम्मीद है कि कश्मीर में जल्द ही शांति बहाल होगी।
- डॉ. अरुण झा।
कश्मीर देश का अभिन्न अंग है। वहां के भटके युवाओं को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। यह जिम्मेदारी हम सभी की है। तभी सुंदर वादियों में शांति लौटेगी। - शाहरुख।