बुंदेलखंड में पान खेती दिन-ब-दिन सिमटती जा रही है। किसान पलायन कर खेती के बजाए मजदूरी करने लगे हैं। जलवायु परिवर्तन और संसाधन की कमी के चलते बुंदेलखंड मेें डेढ़ दशक में पान की खेती दस फीसदी रह गई है। यही हालात रहे तो कुछ सालों बाद पान की खेती यहां समाप्त हो सकती है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से पान की खेती पर छात्रा द्वारा किए गए शोध कार्य में यह तथ्य सामने आए हैं।
हमीरपुर के राठ की रहने वाली सुषमा भदौरिया ने बीयू से छतरपुर जनपद में पान की खेती पर पर्यावरणीय प्रभाव विषय पर पीएचडी की है। मंगलवार को हुए दीक्षांत समारोह में उन्हें पीएचडी उपाधि दी गई। सुषमा ने बताया कि पिछले 15 सालों से जलवायु परिवर्तन ने पान उत्पादकों की जीविका को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। पान बरेजे के निर्माण से लेकर फसल तैयार होने तक कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गर्मियों में तीन बार सिंचाई करनी पड़ती है, ऐसे में पानी की कमी रोड़ा बन रही है। पान की कृषि के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस का तापमान उपयुक्त माना जाता है लेकिन पिछले कुछ सालों से मई-जून में तापमान लगभग 48 डिग्री तक पहुंचना पान की कृषि के लिए हानिकारक है। अतिवृष्टि की समस्या रोगों का प्रकोप, बरेजा निर्माण सामग्री का अभाव होना भी समस्याएं हैं।
लगभग डेढ़ दशक पहले बुंदेलखंड में पान की खेती करने वाले किसानों की संख्या अस्सी फीसदी से घटकर 10 फीसदी रह गई है। शोध में पता चला कि खेती करने वाले किसान दूसरे महानगरों में पलायन कर मजदूरी करने लगे हैं।
उन्होंने बताया कि अधिकतर किसान दूसरों के खेत किराए पर लेकर खेती करते हैं। लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए अब यह हालात पैदा हो गए हैं कि लोग पान की खेती के लिए अपनी जमीन नहीं दे रहे हैं। जो पान का बाजार सात-आठ साल पहले मंडियों में हफ्ते में तीन दिन लगता था, वो अब एक दिन में ही सिमट गया है।
खेती कम होने के यह हैं प्रमुख कारण
- तापमान बढ़ रहा, जल स्तर गिर रहा
- कोल्डस्टोरेज की व्यवस्था नहीं
- यातायात की पर्याप्त सुविधा नहीं
- बारिश कम होने से सूख रहे तालाब
- ट्यूबवेल से सिंचाई को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा
पान में होते कई औषधीय गुण
- पान के सेवन से कफ दूर हो जाता है
- कब्ज में पान लाभदायक होता है
- बंगला पान के डंठल से मस्सों में मिलता आराम
- बंगला पान के सेवन से गले की खरास में मिलता आराम
- पान का बीड़ा गरिष्ठ भोजन को कम समय में पचा सकता
- इसका तेल त्वचा संक्रमण, रक्त खांसी, सिरदर्द में फायदेमंद
- गायक राग साफ करने और आवाज सुधारने के लिए पान की जड़ चूसते
- पान के रस को 3-4 ग्राम शहद के साथ सेवन करने से सूखी खांसी मिटती है
- बच्चों को सर्दी लगने पर पान को गर्म कर जरा सा एरंड का तेल लगा सीने में बांधने से सर्दी कम हो जाती
ऐसे मिल सकता बढ़ावा
- पान कृषि के लिए पर्यावरण के अनुकूल ही बरेजा निर्माण की अत्याधुनिक तकनीकी का प्रयोग किया जाना चाहिए।
- पान की नवीनतम प्रजातियों की पहचान की जानी चाहिए, जो अध्ययन क्षेत्र के पर्यावरण के अनुकूल हों।
- जैविक उत्पादों का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए, क्योंकि जैविक खाद के उपयोग से उत्पन्न पान के पत्ते 15 दिनों तक ताजे रह सकते हैं। जबकि रासायनिक खाद से पत्ते सात दिन में पीले पड़ने लगते हैं।
- पान को अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए कोल्डस्टोरेज व परिवहन की व्यवस्था होनी चाहिए।
- समय-समय पर श्रमिकों के प्रशिक्षण की व्यवस्था की जानी चाहिए।
- पान व्यापार से संबंधित समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए सहकारी समितियों के जरिए कार्य किया जाना चाहिए।
- सेल्फ हेल्प ग्रुप, महिला किसान सशक्तीकरण परियोजना एवं नेशनल रूरल रिवलीहुड मिशन के बारे में लोगों को बताया जाए एवं पान कृषि में महिलाओं की भागीदारी हो।