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देव दर्शन के लिए मंदिर तो खुले पर भक्तों की भीड़ रही कम

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उनाव बाला का मंदिर। - फोटो : DEHAT
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झांसी। लॉकडाउन के साथ ही मंदिरों में भक्तों के प्रवेश पर लगाई गई रोक आज कई दिनों के बाद हटा ली गई। ओरछा के रामराजा मंदिर, दतिया की पीतांबरा पीठ व उनाव बालाजी स्थित सूर्य मंदिर आठ जून सोमवार से भक्तों के लिए खोल दिए गए। तीनों स्थानों पर बालभोग की आरती के साथ ही मंदिर के मुख्य द्वार खोलकर भक्तों को भगवान के दर्शन के लिए प्रवेश दिया गया। मंदिरों पर सैनिटाइजेशन की व्यवस्था के साथ सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए गोले बनाए गए हैं, इन्हीं में खड़े होकर भक्तों ने भगवान के दर्शन किए। प्रसाद व फूल मालाएं चढ़ाए जाने पर रोक रही। ओरछा व दतिया में पहले दिन वे ही भक्त दर्शन कर सके जिन्होंने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करवा लिया था।
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फिलहाल राजभोग की लगवाए जाने पर भी प्रतिबंध
ओरछा। बाल भोग की आरती के साथ रामराजा मंदिर का मुख्य द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। पहले दिन दर्शनार्थियों की संख्या काफी कम रही। इसका कारण एक तो ऑनलाइन अनुमति की औपचारिकता आम भक्तों को करने में अभी दिक्कत आई तो वहीं कुछ लोग कोरोना के डर से सार्वजनिक स्थलों पर जाने से बचते रहे। सुबह से लेकर रात की शयन आरती तक सौ से कम ही भक्त रामराजा मंदिर में दर्शनों को पहुंचे जबकि प्रबंधन ने चार पहर की आरती में कुल दो सौ भक्तों के प्रवेश का लक्ष्य रखा था। मंदिर के प्रवेश द्वार के अंदर ही सैनिटाइजर मशीन रखी गई है, जहां भक्तों को पहले सैनिटाइज किया और इसके बाद दर्शन के लिए अंदर जाने दिया गया। इस बात की खास सख्ती बरती गई कि कोई भी भक्त फूल माला अपने साथ मंदिर के अंदर न ले जाए पाए। आरती के बाद प्रसाद भी वितरित नहीं किया गया। उधर, बाल भोग, राजभोग व ब्यारी भोग के लिए कटने वाली रसीदों वाले काउंटर भी बंद रहे, क्योंकि मंदिर प्रबंधन ने तय किया है कि कोरोना काल में मंदिर की ओर से भगवान को प्रसाद लगेगा किसी भक्त के द्वारा निजी तौर पर नहीं लगवाया जाएगा।
सरकार द्वारा तय की गई गाइड लाइन के अनुसार सारा काम किया जा रहा है। सतर्कता के तहत फिलहाल न तो प्रसाद चढ़ाया जा रहा है और न ही चरणामृत दिया जा रहा है।
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रमाकांत शरण महाराज प्रधान पुजारी
दतिया। कई दिनों के बाद मां पीतांबरा का दरबार भक्तों के लिए खोला गया, जिन भक्तों ने एक दिन पहले पंजीयन करवा लिया था वह सुबह की आरती में पहुंचे । फूला माला व प्रसाद चढ़ाने पर प्रतिबंध रहा। इसके लिए मंदिर परिसर में एक अलग से काउंटर लगाया गया था, जहां मां पीतांबरा के पहले से ही चढ़े हुए प्रसाद के डिब्बे भक्तों के लिए उपलब्ध थे। पहले दिन प्रबंधन ने चार सौ भक्तों का लक्ष्य रखा था पर इससे कम ही लोगों ने दर्शन किए।
उनाव बालाजी। प्राचीन सूर्य मंदिर का मुख्य द्वार सेोमवार को भक्तों के लिए खोल दिया, पर अंदर गर्भगृह में अब तक भक्त सूर्य देवता को जल चढ़ाते थे, इस पर प्रतिबंध रहा। लोगों को दूर से ही दर्शन की इजाजत थी, अंदर नहीं जाने दिया गया। पहले दिन पुजारियों की ओर से विशेष थाल का भोग लगाया गया। भक्तों की संख्या यहां भी काफी कम ही रही।

दतिया।- फोटो : DEHAT

ओरछा का रामराजा मंदिर परिसर- फोटो : DEHAT

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