संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के शहर में हमेशा से सौहार्द और सद्भाव की मिसाल कायम रही है। यहां बाहर दतिया गेट पर आमने-सामने बने मंदिर और मस्जिद भी आपसी सौहार्द की झलक पेश करते हैं। जब मंदिर में आरती होती है तो मस्जिद में अजान के लिए लाउडस्पीकर की आवाज कम कर दी जाती है। वहीं जब मस्जिद में अजान होती है तो मंदिर में घंटे नहीं बजते। पूजा और इबादत में खलल न पड़े इसके लिए दोनों धर्माें के लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं।
बाहर दतिया गेट स्थित मस्जिद-ए-अक्सा तकरीबन सौ साल पुरानी है। मस्जिद के सामने ही हनुमान जी के मंदिर का निर्माण सन 1961 में कराया गया था। मंदिर और मस्जिद आमने-सामने होने पर यहां आपसी सौहार्द और भाईचारे की अनूठी मिसाल कायम है। खासियत यह है कि यहां के लोग एक दूसरे के मजहब का बड़ा ही सम्मान करते हैं। आलम यह है कि जब मंदिर में कोई बड़ा कार्यक्रम अथवा प्रतिदिन आरती होती है तो मस्जिद से होने वाली अजान के लाउडस्पीकर की आवाज को धीमा कर दिया जाता है। वहीं रमजान अथवा जुमे के दौरान मंदिर में की जाने वाली पूजा और आरती के समय में तब्दीली कर दी जाती है। जिससे हर समय यहां अमन कायम रहता है।
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- मंदिर और मस्जिद नजदीक होने के बाद भी दोनों ही समुदाय के लोग एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करते हैं। लोग किसी भी तरह का विवाद पैदा नहीं होने देते हैं। जिससे इस इलाके में हमेशा अमन रहता है।
- जीतू महाराज, पुजारी हनुमान मंदिर
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- झांसी सदियों से अमन की नगरी के रूप में जानी जाती है। आरती और इबादत के वक्त को आपसी सहमती से बातचीत कर घटा और बढ़ा लिया जाता है। -अब्दुल रहमान, मुअज्जिन, अक्सा मस्जिद