बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालय ढिमरपुरा के शिक्षकों ने खुद के पैसों से हैंडपंप लगवाकर पेयजल समस्या के समाधान के लिए एक नजीर पेश की है। यहां जल निगम ने बोरिंग कराकर काम बंद कर दिया था। शिक्षकों का कहना है कि कई छोटी-मोटी समस्याओं का समाधान विद्यालय स्तर पर ही हो सकता है।
बबीना ब्लाक की ग्राम सभा पुनावली के प्राथमिक विद्यालय ढिमरपुरा में पेयजल की व्यवस्था न होने की वजह से बच्चे पानी के लिए परेशान रहते थे। मिड डे मील पकाने के लिए भी रसोइये को दो किलोमीटर दूर कुएं से पानी लाना पड़ता था। समस्या के समाधान के लिए मई माह में विद्यालय में जल निगम ने बोरिंग की थी, जिसमें पानी भी पर्याप्त निकल आया था, परंतु हैंडपंप नहीं लगाया गया, जिससे समस्या जस की तस बनी रही। हैंडपंप लगवाने के लिए शिक्षकों ने विभाग से संपर्क किया, परंतु बात नहीं बनी। इस पर प्रधानाध्यापक उमा द्विवेदी, सहायक अध्यापक रचना तिवारी, हेमाद्री सिरोठिया व सपना पाठक ने खुद पैसे इकट्ठे कर स्कूल में हैंडपंप लगवा दिया। इस पर लगभग छह हजार रुपये का खर्च आया।
सहायक अध्यापक रचना तिवारी ने बताया कि गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने के लिए बच्चों को स्कूल में बेहतर माहौल देना जरूरी है। इसके लिए शिक्षकों को खुद आगे आना होगा। पानी मूलभूत आवश्यकता है। पानी की जरूरत करना पुण्य का कार्य है।
जल निगम ने अधूरे छोड़े हैंडपंप
सूखे के चलते जल निगम द्वारा विद्यालयों में हैंडपंप लगवाए गए थे, लेकिन कुछ विद्यालयों में केवल बोरिंग ही हुई, तो कई में हैंडपंप के इर्दगिर्द प्लेटफार्म नहीं बनाया। काम अधूरा ही छोड़ दिया। जल निगम ने जल्द ही अधूरा काम पूरा करने का भरोसा दिया है। ढिमरपुरा विद्यालय में पानी की बेहद किल्लत थी। शिक्षकों ने अपने खर्च से स्कूल में हैंडपंप लगवाकर अच्छा संदेश दिया है।
- दीपक श्रीवास्तव, खंड शिक्षाधिकारी, बबीना