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आर - पार की लड़ाई का आ गया है वक्त, चीन को उसकी ही भाषा में सिखाना होगा सबक

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झांसी। सीमा पर चीन से हुई झड़प के दौरान 20 भारतीय जवानों की शहादत से सेना के रिटायर्ड अफसरों के खून में भी उबाल है। उनका कहना है कि 1962 में चीन ने धोखा देकर भारत की पीठ में छुरा घोंपा था और 2020 में एक बार फिर उसने धोखे से हमला बोला है। तब हम कमजोर थे, लेकिन आज हमारी सेना चीन को सबक सिखाने के लिए पूरी तरह से सक्षम है। अब आर-पार की लड़ाई का वक्त आ गया है। सेना के हौसले बुलंद हैं। चीन की इस नापाक करतूत का सबक सिखाना जरूरी हो गया है। जरूरत पड़ने पर वे एक बार फिर मैदान में उतरने को तैयार हैं।
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आतंकियों से मुठभेड़ में गवां दिया था हाथ, अब भी बंदूूक उठाने को तैयार
कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनाती के दौरान नायब सूबेदार आरके सिंह की 24 अगस्त 1997 की रात आतंकियों से मुठभेड़ हुई थी। आतंकियों की ओर चलीं छह गोलियां आरके सिंह के दाएं हाथ और कमर के नीचे के हिस्से में लगी थीं। बावजूद, हार नहीं मानी थी और सुबह मौके से आतंकियों की लाशें बरामद हुई थीं। हालांकि, इस घटना में आरके सिंह ने अपना हाथ खो दिया था। मुश्किल से जान बच पाई थी। चीन बॉर्डर पर 20 जवानों की शहादत की खबर सुनने के बाद से उनका गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका कहना है कि अब वक्त आर-पार की लड़ाई का आ गया है। बगैर किसी देरी के भारत को चीन पर हमला बोल देना चाहिए। सेना के हौसले बुलंद है। उन्होंने कहा कि उनकी दिली इच्छा है कि वे चीन बॉर्डर पर जाकर भारतीय जवानों की शहादत का बदला लें। वे कहते हैं कि भले ही उनका एक हाथ काम का नहीं बचा है, लेकिन लड़ाई में हौसला सबसे बड़ी चीज होती है, जो उनमें भरपूर है।
चीन से हर भारतीय लड़े, अर्थव्यवस्था पर बोले हमला
चीन से लड़ाई अब हर भारतीय को लड़नी होगी। चीनी वस्तुओं का बहिष्कार कर देश का हर नागरिक चीन की अर्थव्यवस्था पर हमला बोले। ये कहना है कि मेजर (रिटायर्ड) जेपी सिंह का। उन्होंने कहा कि चीन की पहचान पूरी दुनिया में धोखेबाज के रूप में है। भारत के सहयोगी देशों की संख्या अधिक है। भारत में चीन बॉर्डर तक सड़क बनाने तथा आत्मनिर्भरता का नारा देने से चीन बौखलाया हुआ है। हमारी सेना का मनोबल ऊंचा है और चीन की हर हरकत का जवाब देने में सक्षम है।
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भारत के मुकाबले कमजोर है चीन की सेना
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट कर्नल जीएस राणा ने बताया कि 1986 में वे चीन के बॉर्डर पर तैनात थे। चीन ने अपनी सीमा में एलएसी के नजदीक हैलीपेड बना लिए थे। भारत के विरोध के बाद वो पीछे हट गया था। चीन की रणनीति के तहत दो किमी आगे आता है और विरोध करने पर एक किमी पीछे हट जाता है। वर्तमान में चीन की सेना कमजोर है, जबकि भारतीय सेना कहीं अधिक ताकतवर। चीन नहीं माना तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
मुगालते में है चीन, भारत की ताकत का नहीं है अंदाजा
1962 की लड़ाई में चीन की सेना का मुकाबला कर चुके रिटायर्ड सूबेदार मेजर विद्या भूषण दीक्षित ने कहा कि तब हमारे पास हथियार नहीं थे। बावजूद, हमारी सेना ने अपने हौसलों के बलबूते पर चीन को कड़ी टक्कर दी थी। लेकिन, तस्वीर एकदम बदल चुकी है। हमारे पर अच्छे हथियार हैं और दुनिया की सबसे शानदार सेना। चीन अभी मुगालते में है। भारत की ताकत का उसे सही अंदाजा नहीं है। हालांकि, चीन किसी भी दशा में युद्ध नहीं लड़ेगा। वो तो बस दुनिया में कोरोना का संक्रमण फैलाने के इल्जामों से सभी ध्यान भटकाना चाहता है।
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