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टैंक की धड़धड़ाहट में झलका बढ़ा हुआ आत्मविश्वास

Thu, 29 Nov 2018 01:53 AM IST
jhansi
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babina chavni - फोटो : demo
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भारत-रूस संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘इंद्र 2018’ का समापन भव्य समारोह के बीच हुआ। इस दौरान टैंक की परेड आकर्षण का केंद्र रही। समारोह के बाद दोनों ही देशों के  सैनिक खासे उत्साहित दिखे। इससे आश्वस्त आला सैन्य अधिकारियों ने कहा कि इस सैन्य अभ्यास के अनुभव भविष्य में बहुत काम आएंगे। भारत-रूस दोनों ही सशक्त और बड़ी सेना हैं। आतंकवाद की बड़ी से बड़ी चुनौती का मिलकर जवाब देने में सक्षम हैं।
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बबीना छावनी में पिछले दस दिनों से चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास के अंतिम दिन दोनों देशों की सैन्य टुकड़ी ने परेड की। भारतीय सेना की ओर से 31 आर्मर्ड डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी) रिव्यूइंग ऑफिसर मेजर जनरल पीएस मिनहास और रूस की 5 मैकेनाइज्ड इनफेंट्री बटालियन के मेजर जनरल सेकॉव ओलिग मोसोविच को सलामी दी गई। परेड के दौरान भारतीय सेना का नेतृत्व कर्नल अनिल चौहान और रूसी सेना का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल कोजिम कर रहे थे। दोनों ही रिव्यूइंग अफसरों ने संयुक्त रूप से परेड का निरीक्षण किया।
इसके साथ ही भारतीय और रूस सेना के बैंड ने बेहतरीन प्रस्तुति दीं। भारतीय सेना के बैंड ने कदम-कदम बढ़ाए जा... की धुन छेड़ी तो सैनिकों का जोश देखते ही बना। साथ ही जहां डाल-डाल पर सोने की चिड़िया करती है बसेरा... की धुन छेड़ कर देशभक्ति का माहौल बनाया। उधर, रूस सेना के बैंड ने भी आकर्षक प्रस्तुति दी। इसके बाद शुरू हुई सेना के बेड़े में शामिल टैंक की परेड। तीन-तीन टैंक की पंक्ति आपस में गजब का समन्वय बनाकर आगे बढ़ रही थीं। उन पर सवार सेना के जवान गौरवान्वित मुद्रा में थे। इस गजब के आत्मविश्वास को देखने के लिए हर कोई आतुर था। इसके बाद बहुत तेज गति से एक के बाद एक सात टैंक दर्शकों के सामने से गुजरे। यह भी परेड का हिस्सा था। इस दौरान टैंक की गड़गड़ाहट से जो माहौल बना उसमें सैनिकों का आत्मविश्वास झलका। इसका सभी ने जोरदार तालियों से स्वागत किया।
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इसके बाद मेजर जनरल मिनहास और मेजर जनरल मुसोविच ने अपने संबोधन में कहा कि संयुक्त सैन्य अभ्यास ने दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत किया है। दोनों ही अनुभवी और सशक्त सेनाओं ने एक साथ कोई भी ऑपरेशन को अंजाम देना सीखा। हथियारों और तकनीकी जानकारी, युद्ध कौशल आदि का आदान-प्रदान किया। आतंकवाद से जूझ रहे विश्व में शांति स्थापना की बारीकियों को समझा। इसके बाद भारत-रूस की सेनाएं अब आतंकवाद की बड़ी से बड़ी चुनौती को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार हैं।

आतिथ्य और आत्मीयता के कायल दिखे मुसोविच
झांसी। सैन्य कौशल के साथ ही भारत-रूस की सेनाओं ने एक-दूसरे की संस्कृति को भी समझा। मेजर जनरल मुसोविच ने भारत के आतिथ्य और आत्मीयता की खुलकर प्रशंसा की। ओरछा व आसपास के अन्य पर्यटन स्थलों को देखकर यहां की भव्य सांस्कृतिक विरासत को समझा। शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद लिया।
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