झांसी। शहर में श्री श्याम चौपड़ा मुक्तिधाम नारायण बाग रोड, बड़ागांव गेट बाहर स्थित श्मशान घाट और उनाव गेट मुक्तिधाम देखकर किसी को भी लगेगा कि यह कोई सुंदर बगीचा व घूमने लायक स्थान है। यहां रख-रखाव के लिए लोग खूब दान दे रहे हैं। वहीं नजर घुमाएं तो जीते-जागते कई मां-बाप वृद्धाश्रम में अकेले रो रहे हैं। लेकिन घरवाले और रिश्तेदारों में कोई उनकी देखभाल करने वाला तक नहीं है। वहीं कई असहाय सड़कों पर घिसट रहे। लेकिन इन पर किसी समाजसेवी का ध्यान नहीं जा रहा है। कोई ऐसे असहायों की सेवा नहीं करने वाला नहीं दिख रहा।
आईटीआई स्थित वृद्धाश्रम की प्रबंधक अनुराधा बताती हैं कि कई लोग अपने बुजुर्गों को वृद्धाश्रम के बाहर छोड़ जाते हैं। बीमार बुजुर्ग हफ्तों अस्पताल में भर्ती रहते हैं लेकिन सूचना देने के बाद भी घरवाले उनका हालचाल लेने तक नहीं आते हैं। आश्रम में ऐसे कई मां-बाप हैं। उन्होंने बताया कि उनके वृद्धाश्रम में इन दिनों 85 महिला-पुरुष बुजुर्ग हैं।
श्री श्याम चौपड़ा मुक्तिधाम नारायण बाग रोड डड़ियापुरा में आलीशान बगीचा किसी का भी मन मोह सकता है। श्मशान में घुसते ही मार्बल फर्श और बाबा भोलेनाथ व बाबा भैरव का मंदिर बना हुआ है। सामने ही दो सुंदर बगीचे हैं। इनमें फव्वारा, खूबसूरत पेड़-पौधे करीने से सजाए गए हैं। पेड़ों को काटकर सुंदर आकार में संवारा गया है। पौधों की सिंचाई के लिए लगे राउंड पंप और पानी पीने से लेकर नहाने तक के लिए बढ़िया सुविधा दी गई है, ताकि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को कोई परेशानी न हो।
इसके अलावा शव को जलाने के लिए टिनशेड, पक्का फर्श और जालियों को भी लगाया गया है। लोगों के बैठने के लिए स्टील की बेंच और छतरियां भी हैं, ताकि लोग धूप और बारिश से बचे रहें। बगल में ही भोलेनाथ का जलाभिषेक करता फव्वारा और जगह-जगह की गई लाइटिंग भी श्मशान को एक सुंदर पार्क का स्वरूप देती है। पार्क में लगे ऊंचे-ऊंचे पेड़ बाहर से देखने पर लगता ही नहीं कि ये कोई मुक्तिधाम है। मुक्तिधाम के इंचार्ज राजा बताते हैं कि पार्क और पेड़-पौधों की खूब देखभाल की जाती है।
वहीं बड़ागांव गेट बाहर स्थित श्मशान घाट की हरियाली और शिवजी का मंदिर भी अलग ही है। यहां पक्के शेड के नीचे लोगों के आराम से बैठने के लिए स्टील फ्रेम कुर्सियां और शव को जलाने के लिए के लिए पक्के शेड वाले चबूतरों की अच्छी व्यवस्था है। इस श्मशान में भी ऊंचे और कटिंगदार पेड़-पौधे करीने से सजे हैं। श्मशान के अंदर लकड़ी का गोदाम चलाने वाले पवन साहू ने बताया कि दान दाताओं की मदद से श्मशान घाट में काफी काम हुआ है। उनाव गेट मुक्तिधाम में तमाम मूर्तियां सजी हैं।