स्वयंसेवकों को सिखाया गया व्यक्तित्व का विकास
झांसी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय योजक वर्ग के दूसरे दिन मंगलवार को योजकों (शिक्षार्थी) को समरसता का पाठ पढ़ाया गया। साथ ही, अलग-अलग सत्रों में संघ प्रमुख मोहन भागवत, सह सरकार्यवाह सुरेश सोनी, दत्तात्रेय समेत अन्य पदाधिकारियों ने व्यक्तित्व विकास पर जोर दिया।
योजक वर्ग के दूसरे दिन स्वयं सेवकों का शारीरिक, बौद्धिक क्षमता, सेवा भक्ति भाव, राष्ट्र भक्ति, समरसता, सर्व समाज को जोड़ने जैसे विषयों पर मार्गदर्शन किया गया। एक सत्र में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि स्वयं सेवकों को सर्वसमाज को जोड़ने के लिए अनुशासित ढंग से काम को बढ़ाना होगा। परिवारों से जुड़कर संघ के संकल्प को बताना होगा। सर सह कार्यवाह सुरेश सोनी, डॉ. कृष्ण गोपाल, दत्तात्रेय होसबोले, डॉ. मनमोहन वैद्य, मुकुंदन ने अलग-अलग टोलियों की बैठक में कहा कि हमें अपने दायित्व को पहचानना चाहिए तथा नए स्वयं सेवकों की क्षमता व समस्या को ध्यान में रखकर उसकी अंतर्निहित शक्तियां व गुणों के विकास का प्रयास करना चाहिए। लोगों को वह शिक्षा दें जो जीवन पर्यंत याद रहे। जीवन को समाज एवं राष्ट्र के लिए उपयोग बनाए। अखिल भारतीय योजक वर्ग में देश भर से 240 योजक (शिक्षार्थी) शामिल होने आए हैं। इसके अलावा वर्ग में संघ के राष्ट्रीय, प्रांतीय व क्षेत्रीय पदाधिकारी मौजूद हैं।
पांच साल में मिलता है दोबारा मौका
राष्ट्रीय स्वयं संघ ने पूरे देश को 44 प्रांतों में बांट रखा है। प्रांतीय व इससे ऊपर के पदाधिकारियों को हर पांच साल में योजक वर्ग में शामिल होने का मौका मिलता है। योजक वर्ग में पदाधिकारियों को नए कार्यक्रमों के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। उनके अब तक कार्य की समीक्षा होती है। वर्ग में संघ का विस्तार व सर्व समाज को जोड़ने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।