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धरे रह गए बड़े-बड़े बोल, स्वच्छता सर्वेक्षण में खुल गई पोल

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नगर निगम - फोटो : ??? ????
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झांसी। स्वच्छता सर्वेक्षण-2020 के अंतिम परिणाम आने के साथ ही नगर निगम अफसरों का दिखाया ख्वाब भी टूट गया। पिछले एक साल से अफसर लगातार पहले दस साफ-सुथरे शहरों में आने का दावा करते रहे। लेकिन, बृहस्पतिवार को जारी परिणामों में झांसी अपने वर्ग (10 लाख आबादी से कम) में फिसलकर 27वें नंबर पर पहुंच गई। जबकि पहले वह बीस स्वच्छ शहरों में शुमार रही थी। हालांकि प्रदेश की रैंकिंग में दूसरे स्थान मिलने पर निगम अफसरों ने राहत की सांस ली है।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय देश भर के नगरीय निकायों में साफ-सफाई आंकने को लेकर स्वच्छता सर्वेक्षण कराता था। इसके तहत साफ-सफाई की व्यवस्था, कूड़ा उठान, ओडीएफ, कूड़े का निस्तारण, सार्वजनिक शौचालयों का रखरखाव, सफाई के नए प्रयोग समेत कई बिंदुओं पर पूरे शहर का मूल्यांकन होता है। सफाई सर्वेक्षण में नंबर बढ़ाने के लिए निगम प्रशासन ने जगह-जगह वॉल राइटिंग कराने के साथ जमकर जागरूकता अभियान चलाया। अभियान को चमकाने में लाखों रुपये खर्च किए गए। लेकिन, डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने एवं उसके निस्तारण की व्यवस्था करने में पिछड़ गए।
सूखा एवं गीला कूड़ा अलग-अलग एकत्रित करना था लेकिन, यह काम भी नहीं हुआ। जनवरी महीने में केंद्रीय टीम ने दौरा करके सफाई की जमीनी हकीकत परखी। कई मोहल्लों में टीम ने पहुंचकर कूड़ा उठान के बारे में पूछा। आम जनता को जोड़ने के लिए सीवर, गंदगी की शिकायतें ऑनलाइन निपटाने पर जोर देना था लेकिन, वह भी नहीं हुआ। इस वजह से आम लोगों की हिस्सेदारी भी दूसरे शहरों के मुकाबले काफी कम रही। इसका खामियाजा झांसी को रैंकिंग में जगह खोकर चुकानी पड़ी। हालांकि यहां की साफ-सुथरी सड़कें, सार्वजनिक शौचालयों की सफाई के चलते काफी नंबर झांसी की झोली में आए, जिससे अपने वर्ग में प्रदेश में दूसरे नंबर में आने में कामयाब रहा।
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अंबिकापुर बनने की राह में रोड़ा बना कूड़ा निस्तारण प्लांट
छत्तीसगढ़ का छोटा सा शहर अंबिकापुर सफाई के मायने में तमाम शहरों के लिए आर्दश बना हुआ है। वर्ष 2017 में वह 15वें नंबर पर था जबकि झांसी पहले दस शहरों में शुमार था लेकिन, उसके बाद अंबिकापुर ने कूड़ा उठान से लेकर निस्तारण तक की व्यवस्था दुरुस्त की जबकि झांसी का कूड़ा निस्तारण प्लांट नष्ट होने के बाद आज तक नहीं बन सका। यहां एनजीटी के निर्देश के विपरीत कूड़ा अभी भी खुले में ही डंप होता है। इसी तरह यहां डोर-टू-डोर कूड़ा उठान व्यवस्था कई कंपनियों के आपसी विवाद के चलते पटरी पर नहीं आ पा रही। भारी मात्रा में कूड़ा सड़कों पर ही पड़ा रहता है। हालांकि प्लास्टिक निस्तारण प्लांट के साथ कूड़ा उत्पादित करने वाले बड़े उत्पादकों पर नियंत्रण करने से झांसी को प्रदेश में दूसरी रैकिंग हासिल हुई है।
1063 अंकों से पिछड़ गई झांसी
छत्तीसगढ़ का अंबिकापुर 5428.31 अंकों के साथ दस लाख की आबादी के शहरों में सबसे साफ-सुथरा शहर माना गया जबकि दूसरे नंबर पर मैसूर 5298.61 एवं नई दिल्ली 5103.27 अंकों के साथ तीसरे नंबर पर रही। वहीं, झांसी को 4365.01 अंकों के साथ 27वें नंबर पर संतोष करना पड़ा जबकि दो साल पहले वह सातवें नंबर पर रही। हालांकि प्रदेश में झांसी को अपने वर्ग में दूसरा स्थान हासिल हुआ है।
अंबिकापुुर भेजेंगे पार्षदों एवं अफसरों का दल
महापौर रामतीर्थ सिंघल ने स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणामों पर संतोष जाहिर करते हुए इसमें सुधार करने की जरूरत बताई है। उन्होंने कहाकि निश्चित तौर पर डोर-टू-डोर कूड़ा न उठने एवं डापिंग प्लांट न होने का हमको खामियाजा उठाना पड़ा लेकिन, कोशिश की जाएगी कि अगले साल तक इसे दुरुस्त कर लिया जाए। महापौर का कहना है अंबिकापुर मॉडल का अध्ययन करने के लिए पार्षदों एवं निगम अधिकारियों का एक दल वहां भेजा जाएगा। उसके आधार पर भी यहां की सफाई व्यवस्था दुरूस्त करने की कोशिश होगी।
परिणाम संतोषजनक हैं हालांकि जनभागीदारी में हमारा प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा। इसे दुरुस्त करने की कोशिश की जाएगी। अगले वर्ष हमारी कोशिश अपनी रैंकिंग में सुधार करने की होगी।
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अवनीश राय, नगर आयुक्त
हमारी ओर से पूरी कोशिश की गई। उप्र में हम दूसरे स्थान पर रहे। राष्ट्रीय रैकिंग में सुधार के लिए कूड़ा निस्तारण व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।
अरुण कुमार गुप्ता, अपर नगर आयुक्त प्रभारी स्वच्छता सर्वेक्षण
अंबिकापुर बनाम झांसी
मानक अंबिकापुर (पहला स्थान) झांसी (27वां स्थान)
अंक 5428.31 4365.01
आबादी 214575 507293
वार्ड 48 60
सफाईकर्मचारी 1165 1600
डोर टू डोर कूड़ा उठान 100 80
कुल कूड़ा 175 मीट्रिक टन 240 मीट्रिक टन
उठान 100 प्रतिशत 80 प्रतिशत
प्रोसेसिंग 100 प्रतिशत 50 प्रतिशत
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