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Jhansi News: मेडिकल कॉलेज में बंद है शिशुओं की सर्जरी

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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में सितंबर 2024 से शिशुओं के ऑपरेशन (पीडियाट्रिक सर्जरी) बंद है। इससे जन्मजात दिक्कत (शौच व मूत्र मार्ग), तालू आदि के ऑपरेशन कराने के लिए परिजन परेशान होते रहते हैं। वहीं, प्राइवेट में ऑपरेशन कराना परिजनों को काफी महंगा पड़ता है। संविदा पर तैनात रहे डॉक्टर ने 2021 से सितंबर 2024 तक करीब एक हजार ऑपरेशन किए। न सिर्फ महिला जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के स्त्री रोग विभाग बल्कि निजी अस्पतालों में जन्म लेने वाले कुछ शिशुओं में जन्मजात दिक्कतें होती हैं। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि रिन्युवल न होने की वजह से संविदा पर कार्यरत पीडियाट्रिक सर्जन अपने सेवा नहीं दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज का प्राचार्य डॉ. मयंक सिंह का कहना है कि सर्जरी विभाग में शिशुओं की होने वाली सर्जरी को जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जा रहा है। पूर्व में संविदा पर तैनात डॉक्टर से संपर्क किया जा रहा है।
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इन स्थितियों में करना पड़ता है ऑपरेशन



शिशु की पीठ पर कुव्वड़ होता है या शौच अथवा मूत्र का मार्ग अविकसित होता है।

शरीर पर गांठ होती है या नाक-होंठ व कान अविकसित होने की वजह से विकृत होते हैं।



सीएमओ ने एक शिशु की करवाई नर्सिंगहोम में सर्जरी



विगत दिनों पुरुष जिला अस्पताल के शौचालय में जन्मे शिशु को महिला जिला अस्पताल में भर्ती किया गया। जब 24 घंटे तक उसने शौच नहीं किया तो डॉक्टरों ने जांच की, तब पता चला कि उसके शौच का रास्ता नहीं है। इस पर शिशु को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। चूंकि, मेडिकल कॉलेज में पीडियाट्रिक सर्जन नहीं है। इसलिए सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने उसका निजी नर्सिंगहोम में ऑपरेशन कराया।
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