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‘मां से अंतिम नमस्ते कर नहर में कूदी थी शोभा

Sun, 20 Dec 2015 01:08 AM IST
ब्यूरो
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झांसी। शिक्षा विभाग कर्मी की पत्नी ने पहले बच्चों को नहर में धकेला, फिर खुद छलांग लगाई थी। खुदकुशी के मामले की पर्तें अब खुलने लगी हैं। पिछले दिनों कर्मी की पत्नी व बच्चे का शव नहर से बरामद हो चुका है जबकि, बेटी का अभी भी कुछ पता नहीं चल सका है।
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बबीना क्षेत्र के ग्राम चमरुआ व हाल राजगढ़ के अंजनी नगर निवासी अरविंद सिंह परमार की पत्नी शोभा (35) व उनके दो बच्चे अंजू (14) व आकाश (10) विगत तेरह दिसंबर से लापता चल रहे थे। इनमें शोभा का शव रविवार की शाम दतिया की तरफ जाने वाली सिजवाहा नहर से बरामद कर लिया गया था।

जबकि, बुधवार की शाम मध्य प्रदेश के अंतर्गत आने वाले सिमराहा बैराज में आकाश का शव मिल गया था। बेटी अंजू का अभी तक पता नहीं चल सका है। शनिवार को परिजन गोताखोरों की मदद से दतिया के अंगूरी बांध में तलाश में जुटे रहे। अंगूरी बांध बेतवा नहर से जाने वाले पानी का अंतिम छोर है।
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पीड़ित के चाचा ने बताया कि तेरह दिसंबर की सुबह साढ़े सात बजे शोभा ने ललितपुर में रहने वाली अपनी मां से अंतिम बार मोबाइल पर बात की थी। शोभा ने मां से मोबाइल पर कहा था कि मां यह मेरी अंतिम नमस्ते है। मां पलटकर कुछ कह पाती, इसके पहले ही शोभा ने मोबाइल स्विच आफ कर लिया।

इसके बाद वह दोनों बच्चों को लेकर खैलार के नजदीक से निकली राजघाट नहर पुलिया पर पहुंची और नहर में बगल से उतरी सीढ़ियों पर बच्चों के साथ जाकर बैठ गई। नहाने की बात कहकर बच्चों से कपड़े उतरवाए और एक-एक कर दोनों बच्चों को धक्का दे दिया। तेज धार में बह रहे बच्चे जब मदद के लिए पुकार रहे थे, कई राहगीरों ने उन्हें डूबता देखा। इसके बाद शोभा ने भी नहर में छलांग लगा दी।

हादसे का चश्मदीद ग्राम चमरुआ में रहने वाला मूलचंद्र भी था। मूलचंद्र ने अरविंद के चाचा रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र सिंह को फोन किया, मगर मोबाइल स्विच आफ मिला। चूंकि, अरविंद भी चुनाव ड्यूटी में गए थे, इस कारण वह उनसे भी संपर्क नहीं कर सका। डर के कारण किसी ने पुलिस से शिकायत नहीं की। गौरतलब है कि विगत 13 दिसंबर को उक्त शिक्षा कर्मी मऊरानीपुर में जिला पंचायत चुनाव की मतगणना में ड्यूटी पर गया था। तब से पत्नी व बच्चे लापता थे।

पचास हजार खर्च होने से नाराज थी शोभा
परिजनों के अनुसार अरविंद के पास पचास हजार रुपये थे, जो उन्होंने बिजली के बकाये बिल, निर्माणाधीन मकान की सामग्री आदि में खर्च कर दिए थे। शोभा अपने पति से पचास हजार रुपये का हिसाब मांग रही थी। जो हिसाब उसे बताया जा रहा था, वह उससे संतुष्ट नहीं थी। इस बात को लेकर पति-पत्नी में झगड़ा भी हुआ। पचास हजार की नाराजगी से शोभा ने ऐसा कदम उठा लिया, जो एक सुखमय परिवार को दुख के सागर में ले गया।
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