मास कम्यूनिकेशन की पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को अब आतंकवाद की रिपोर्टिंग के गुर सिखाए जाएंगे। देश की सुरक्षा के मद्देनजर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने पत्रकारिता की पढ़ाई कराने वाले शिक्षा संस्थानों को हाल ही में इस संबंध में निर्देश जारी किया है।
यूजीसी ने कहा है कि रिपोर्टिंग के दौरान कहीं कोई ऐसी सूचना और खबर प्रकाशित न कर दी जाए, जो आतंकवादियों की मददगार साबित हो सके। इसलिए पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान अब विद्यार्थियों को रिपोर्टिंग से देश की सुरक्षा को होने वाले नफा, नुकसान की भी बारीकियां समझाई जाएंगी। छात्रों को बताया जाएगा कि आतंकी वारदात की कवरेज के दौरान ब्रेकिंग न्यूज देते समय काफी सावधानी बरती जाए। कहीं कोई ऐसा सुराग न दे दिया जाए, जो देश की सुरक्षा के लिए घातक साबित हो सके। यूजीसी ने सभी शिक्षा संस्थान को इस मुद्दे को बहुत गंभीरता से पढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
मालूम हो कि सन 2008 में मुंबई के होटल ताज पर हुए हमले के दौरान टीवी चैनलों द्वारा लाइव रिपोर्टिंग के वक्त आतंकियों से मोर्चा ले रहे सुरक्षा बलों के जवान की लोकेशन और संभावित प्लान को लेकर लगातार विजुअल दिखाए जा रहे थे। इसी की मदद में पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आकाओं द्वारा अजमल कसाब समेत दस आतंकवादियों को पल-पल की खबर दी जा रही थी और उन्हें अगले प्लान की रणनीति समझाई जा रही थी। बाद में खुफिया विभाग द्वारा की गई तहकीकात में यह बात उजागर हुई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी कर किसी भी आतंकी हमले की लाइव रिपोर्टिंग पर पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया था।