झांसी।
पांच सौ और पांच हजार रुपये के ड्राफ्ट के लालच में बीएड काउंसलिंग कराने आ रहे छात्र-छात्राएं कॉलेजों के एजेंटों के जाल में फंस रहे हैं। ड्राफ्ट देने के एवज में ये एजेंट विद्यार्थियों से गोपनीय जानकारी मांग रहे हैं। छात्रों की डिटेल मिलते ही एजेंट अपने कॉलेज की च्वाइस लॉक कर देते हैं। इससे विद्यार्थी उनकी ठगी का शिकार हो रहे हैं।
काउंसलिंग को आने वाले छात्र-छात्राओं को वित्त अधिकारी, लखनऊ यूनिवर्सिटी के नाम से दो ड्राफ्ट बनवाकर लाने पड़ते हैं। 500 रुपये का ड्राफ्ट काउंसलिंग फीस का होता है, जबकि 5,000 रुपये कॉलेज फीस का।
सीटें खाली रहने की संभावना के चलते बीएड कॉलेजों ने अपने एजेंटों को सक्रिय कर दिया है। ये एजेंट काउंसलिंग कराने आ रहे विद्यार्थियों को मुफ्त में दोनों ड्राफ्ट देकर उनसे गोपनीय जानकारी जैसे रोल नंबर, जन्मतिथि, रजिस्ट्रेशन नंबर आदि पता कर ले रहे हैं। चूंकि, ड्राफ्ट उन्हीं को होता है, इसलिए इसका नंबर पहले से ही पता होता है। काउंसलिंग हो जाने के बाद जैसे ही विद्यार्थी निकलता है, ये एजेंट एनआईसी वेबसाइट पर जाकर ओटीपी फिर से भेज देते हैं।
चूंकि, नई व्यवस्था के तहत ओटीपी अथवा पिन नंबर स्क्रीन पर भी दिखता है, ऐसे में एजेंट यह गोपनीय नंबर हासिल कर तुरंत कॉलेज की च्वाइस लॉक कर देते हैं। जब तक विद्यार्थी को इसकी जानकारी हो पाती है, बहुत देर हो चुकी होती है।
बीयू के काउंसलिंग समन्वयक डॉ. प्रतीक अग्रवाल का कहना है कि कुछ छात्रों ने अन्य व्यक्ति द्वारा कॉलेज च्वाइस लॉक हो जाने की शिकायत की है। ऐसा विद्यार्थियों की गलती से हो रहा है। विद्यार्थियों को अपनी जानकारी के प्रति पूरी तरह सचेत रहना चाहिए।
कोई भी जानकारी मांगे, उसे नहीं दें।
सात साल से सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं
ऑनलाइन बीएड काउंसलिंग शुरू हुए लगभग सात साल हो चुके हैं। अब तक एनआईसी द्वारा अपना सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं किया गया है। ओटीपी अथवा पिन नंबर के कंप्यूटर स्क्रीन पर दर्शाने की नई व्यवस्था एनआईसी ने की है। ऐसा पहले, दूसरे चरण के कई विद्यार्थियों को ये नंबर नहीं जा पाने के चलते हुआ लेकिन अब इसी का फायदा कॉलेज उठा रहे हैं। जब वो विद्यार्थी से रोल नंबर, जन्मतिथि, रजिस्ट्रेशन और ड्राफ्ट नंबर पता कर लेते हैं, तो इनके सहारे एनआईसी की वेबसाइट पर जाकर ओटीपी अथवा पिन नंबर हासिल कर च्वाइस भर देते हैं।