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शुल्क प्रतिपूर्ति हथियाने के लिए संख्या से अधिक छात्रों को स्कूलों में दाखिल बताया

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झांसी। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति हथियाने के लिए कई निजी प्रोफेशनल विद्यालयों ने मानक से अधिक छात्रों के प्रवेश दर्शाया दिए। ऐसे कई मामले सामने आने पर निदेशक ने शुल्क प्रतिपूर्ति हासिल करने वाले सभी विद्यालयों की जांच कराने का निर्देश दिया है।
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अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के ढाई लाख रुपये एवं अन्य वर्गों के लिए दो लाख रुपये की सालना आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिया जाता है। सामान्य एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लिए यह योजना बजट आधारित है जबकि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सभी छात्रों को योजना का लाभ दिया जाता है। केंद्र सरकार भी आर्थिक मदद देती है। सभी छात्रों को प्रतिपूर्ति का लाभ मिलने की वजह से शिक्षण संस्थान इन छात्रों को लुभाने की कोशिश में रहते हैं। इंजीनियरिंग, मेडिकल, आईटीआई, कम्प्यूटर कोर्स जैसे तमाम व्यवसायिक कोर्स कराने वाले संस्थान अपने यहां अनुसूचित जाति के अधिक विद्यार्थियों का दाखिला दिखाते हैं ताकि सरकार से शुल्क भरपाई होने पर अपनी फीस वसूल सकें। इसके लिए फर्जी छात्रों तक का दाखिला ले लिया जाता। बताया जा रहा है कि जिस वर्ग की आबादी करीब 21 फीसदी है लेकिन, शिक्षण संस्थानों में करीब 65 फीसदी तक छात्रों को प्रवेश दिया गया है।
प्रोफेशनल कोर्स कराने वाले निजी संस्थानों में सर्वाधिक शिकायतें बताई जा रहीं। इस वर्ग के अधिकतम तीस फीसद छात्र होने चाहिए लेकिन, पिछले सत्र में कई विद्यालय ऐसे सामने आए जहां इससे अधिक छात्रों के प्रवेश दिखाए गए। ऐसी शिकायत सामने आने पर अधिकारियों के कान खड़े हो गए। निदेशक ने जनपद स्तर पर सभी विद्यालयों की जांच कराने का निर्देश दिए हैं। जिन संस्थानों में इस वर्ग के तीस फीसदी से अधिक छात्रों को प्रतिपूर्ति की गई है उसके दस्तावेज खंगाले जाएंगे। अधिकारियों के मुताबिक एक करोड़ से अधिक की धनराशि हासिल करने वाले शिक्षण संस्थानों की भी जांच होगी। पिछले तीन वर्ष के रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे। वहीं, जिला समाज कल्याण अधिकारी सुनील कुमार सिंह ने ऐसी जांच को नियमित प्रक्रिया बताया है। उनका कहना है कि एक करोड़ रुपये से अधिक की प्रतिपूर्ति नहीं की गई है।
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