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अपनों को बताइए ‘मैं हूं ना’...चुटकियों में भाग जाएगा ‘स्ट्रेस’

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झांसी। ‘ये माना जिंदगी है चार दिन की, बहुत होते हैं यारों चार दिन भी..’ फिराक गोरखपुरी की ये चंद लाइनें कहीं न कहीं जिंदगी का तनाव कम करती हैं। मनोचिकित्सक और मनोवैज्ञानिक भी बता रहे हैं कि तनाव भरी बातों को हंसकर भुला देना ही इसका सबसे बढ़िया इलाज है। अपनों के बीच रहकर उन्हें ‘मैं हूं ना’ का अहसास कराना और एक प्यार भरी झप्पी तनाव भगाने का सबसे बढ़िया टॉनिक साबित होता है। इससे स्ट्रेस चुटकियों में भागता है।
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डॉक्टरों की मानें तो जिला अस्पताल, मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं परामर्श केंद्र और अन्य मनोचिकित्सकों के पास हर रोज 50-60 से अधिक केस आ रहे हैं। जहां 10 साल के बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक किसी न किसी तरह के स्ट्रेस (तनाव ) से परेशान हैं। ऐसे में स्थिति बहुत खराब न हो तो काउंसलिंग के जरिए डॉक्टर यही सलाह दे रहे हैं कि अपनों का साथ, दोस्तों की गपशप और बच्चों के बीच अपना बचपन जीने से व्यक्ति हर तरह के तनाव से दूर सकता है।
कम हो गई है तनाव सहने की शक्ति..नींद न आने के मामले भी बढ़ रहे
पढ़ाई या काम के सिलसिले में लोगों को अकेले रहने की आदत पड़ चुकी है। मोबाइल भी अब आदत की बजाय नशे की लत जैसा हो गया है। लोगों ने एक-दूसरे से मिलना-जुलना कम कर दिया है। परिवार की बजाय लोग सोशल मीडिया के नजदीक हो गए हैं। बच्चे-बुजुर्ग अकेलापन महसूस करने लगे हैं। लोगों में तनाव सहने की शक्ति कम हो गई है। इससे जिंदगी में घरेलू तनाव अधिक बढ़ रहा है। ऐसी ही क ई समस्याओं से स्ट्रेस के केस भी बढ़ रहे हैं। जिला अस्पताल में रोज 30-35 केस आते हैं। अब तो तनाव के कारण नींद न आने की समस्या के भी केस बढ़ रहे हैं। इस कारण लोगों में नशे की लत बढ़ रही है। इसके मरीज भर्ती भी हो रहे।
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डॉ. शिकाफा जाफरीन-मानसिक रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल
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अपनों का साथ जरूरी है...यही स्ट्रेस भगाने की सबसे बढ़िया दवा
तनाव को दिल और दिमाग में बैठाने से यह बीमारी बन जाता है। केंद्र में हर महीने पति-पत्नी से जुड़े करीब 45 मामले, बच्चों से जुड़े करीब 15-20 और सिजोफ्रेनिया के 15 से अधिक मामले आ ही जाते हैं। इसके अलावा लगातार तनाव रहने से बढ़े डिप्रेशन के मामले भी 20 से अधिक ही आते हैं। इनमें 70 फीसदी केस ऐसे होते हैं जिनमें घरवालों थोड़ी सी देखभाल, अपनापन और काउंसलिंग से संबंधित व्यक्ति ठीक हो जाता है। इसलिए जरूरी है कि परिवार को समय दें। कई केस में तो मोबाइल और एकांत ही परिवार में स्ट्रेस का कारण देखा गया। स्ट्रेस कोई बीमारी नहीं है, जिंदगी की भागदौड़ में अपनों का साथ जरूरी है...और यही स्ट्रेस भगाने की सबसे बढ़िया दवा है।
डॉ. एलके सिंह-मनोवैज्ञानिक परीक्षण एवं परामर्श केंद्र
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10 साल का बच्चा भी तनाव में आ रहा, ठीक नहीं हैं ये स्थितियां
आज 10 साल के बच्चे से लेकर 50 साल तक के लोग तनाव में हैं। ये स्थितियां घर-परिवार और समाज के लिए सही नहीं हैं। हर रोज आठ-दस केस आते हैं, इसमें कई लोग ऐसे होते हैं जो तनाव की वजह बनी समस्या खत्म होने के बाद उसी बात को लेकर तनाव में बने रहते हैं। यह स्थिति व्यक्ति को और ज्यादा बीमार कर देती है। अच्छी लाइफ जीने के लिए परिवार के साथ रहें और दोस्तों का दायरा बढ़ाएं और मोबाइल व तंग करने वाली समस्याओं से दूर रहें।
डॉ. अर्जित गौरव श्रीवास्तव-मनोचिकित्सक
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काउंसलरों के अनुसार ऐसे कम कर सकते हैं तनाव
-अपने बचपन के दिन याद करें, कैसे आप मम्मी-पापा और भाई-बहनों के साथ हंसते खेलते दिन बिताते थे, आज भी जब समय मिले, उनसे मिलकर बातें करें।
-ऑफिस का तनाव घर पर न निकालें, बच्चों के साथ खेलें, परिवार के साथ बैठें, खाना-नाश्ता साथ करें, खुलकर अपनी बात करें और उनकी सुनें। मोबाइल की आदत कम करें
-घर में कोई तनाव में है तो तुरंत उसे बातचीत से दूर करने का प्रयास करें, उसे बताएं आप सब हमेशा उसके साथ हैं, बच्चों को महसूस कराएं कि वह अकेले नहीं हैं।
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