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आचार संहिता लगते ही थमा विकास

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nirwachan aayog - फोटो : demo
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लोकसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता रविवार को लागू हो गई। इसके साथ ही विकास की गति पर विराम लग गया। आचार संहिता के दौरान नये काम शुरू नहीं होंगे और पुरानों के लिए बजट आवंटित नहीं होगा। पूरी प्रशासनिक मशीनरी चुनावी मोड में रहेगी। जबकि, जिले में विकास की कई परियोजनाएं अधूरी पड़ी हुई हैं। सालों पुरानी इन योजनाओं को पूरा होने की मियाद कभी की गुजर चुकी है। बावजूद, इनका लोकार्पण अब तक नहीं हो पाया है। ऐसे में विकास की ये तस्वीर अब चुनाव बाद ही पूरी हो सकेगी।   
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- सुपर स्पेशिलिटी ब्लॉक
महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में 150 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे सुपर स्पेशिलिटी ब्लॉक (एसएसबी) का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अंतर्गत बनने वाले इस ब्लॉक में नेफ्रोलॉजी, यूरोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, कार्डियोलॉजी, प्लास्टिक सर्जरी का अलग वार्ड होगा। हर विभाग में 60 मरीजों को भर्ती करने के लिए बेड उपलब्ध होंगे। ब्लॉक शुरू होने के बाद मरीजों को किडनी रिप्लेसमेंट, प्लास्टिक सर्जरी, कार्डिक सर्जरी समेत तमाम सुविधाएं मिलने लगेंगी। हालांकि, इन सुविधाओं का लाभ लेने के लिए मरीजों को अभी कुछ समय और वंचित रहना पड़ेगा।


- 500 बेड अस्पताल
मेडिकल कॉलेज में लगभग छह साल से निर्माणाधीन 500 बेड का अस्पताल अब तक पूरा नहीं हो पाया है। 27 सितंबर 2012 को पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने झांसी दौरे के दौरान 123 करोड़ रुपये की लागत से 500 बेड अस्पताल बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद अस्पताल को पूरा वातानुकूलित करने का निर्देश दे दिया गया। अक्तूबर 2016 तक इसका निर्माण पूरा होना था, लेकिन कई बार इसकी तिथि बढ़ाई गई। हालांकि, काफी हद तक अस्पताल का निर्माण पूरा भी हो चुका है। बताया गया कि लगभग 70 करोड़ रुपये की आखिरी किस्त का इंतजार है। ये मिलते ही अस्पताल शुरू हो जाएगा।
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- सैनिक स्कूल
15 मई 2015 को झांसी आए प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सैनिक स्कूल का शिलान्यास किया था। हालांकि, तब इसके लिए जमीन तय नहीं थी। शिलान्यास के बाद प्रशासन ने सदर तहसील के ग्राम दिगारा में इसके लिए पचास एकड़ जमीन चिह्नित कर राजस्व अभिलेखों में ये सैनिक स्कूल के नाम दर्ज कर दी थी। चार साल में काम पूरा होना था। इसके निर्माण पर अब तक पचास करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है। मुख्य भवन बनकर तैयार है। लेकिन, पानी, सड़क, फर्नीचर जैस अन्य जरूरी संसाधनों के लिए तैंतीस करोड़ रुपये की और दरकार है। ये बजट न मिलने की वजह से स्कूल का निर्माण अधूरा पड़ा हुआ है।  

- कषि विश्वविद्यालय
केंद्र की यूपीए सरकार ने अपने आखिरी दिनों में झांसी को केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की सौगात दी थी। इसके बाद इसका संचालन आईजीएफआरई के पुराने भवन में शुरू कर दिया गया था, जो अब भी जारी है। पंद्रह महीने पहले इसके मुख्य भवन का निर्माण शुरू किया गया था, जिसका ढांचा ही बनकर तैयार है। फर्निशिंग, बिजली, पानी की व्यवस्था जैसे अभी जरूरी काम लटके हुए हैं। यही वजह है कि इसे पीएम के पिछले दौरे के दौरान लोकार्पण की सूची में शामिल कर दिया गया था, लेकिन काम अधूरा होने की वजह से बाद में इसे हटा लिया गया। अब इसका काम भी अगली सरकार में पूरा होने के आसार हैं।


- पिंक टॉयलेट
महिलाओं को होने वाली दिक्कतों का ध्यान में रखते हुए स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत महानगर में पांच स्थानों पर पिंक टायलेट बनाए जाने थे। बुंदेलखंड महाविद्यालय के सामने, शहर कोतवाली के पास, कचहरी चौराहे व सीपरी बाजार में पिंक टायलेट के निर्माण का काम शुरू भी कर दिया गया था। लेकिन, इसका अभी तक ढांचा बनकर तैयार हो पाया है, लेकिन अन्य संसाधन अभी यहां नहीं हैं। जबकि, इसे स्मार्ट सिटी की झलक माना जा रहा है। लेकिन, चुनाव में लोगों को ये झलक देखने को नहीं मिल पाएगी। जन सहूलियतों के लिए महिलाओं अभी और परेशान होना होगा।

- स्मार्ट सड़क
स्मार्ट सिटी मिशन योजना के तहत शहर में एक स्मार्ट सड़क बनाई जानी थी। इसके लिए रेलवे स्टेशन से इलाइट - सीपरी रोड, इलाइट चौराहा, जीवनशाह तिराहा, किला मार्ग होते हुए मिनर्वा चौराहे तक के मार्ग का चयन किया गया था। कागज पर सड़क का खाका एक साल पहले तैयार कर लिया गया था, जो सपनों की सड़क जैसा था। यानी कि सड़क के दोनों और नाले-नालियां अंडर ग्राउंड बनाई जानी थीं। बिजली के तार अंडरग्राउंड किए जाने थे। सड़क के दोनों और फुटपाथ बनाकर उस पर बैंच बनाई जानी थीं। जगह - जगह पीने के पानी का बंदोबस्त होना था। लेकिन, यह योजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी।  
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- सीपरी बाजार ओवरब्रिज
सीपरी बाजार क्षेत्र की यातायात की समस्या को दूर करने के लिए यहां जून 2014 में ओवरब्रिज का निर्माण शुरू किया गया था, जिसके निर्माण की मियाद चौबीस माह निर्धारित की गई थी। बारह सौ मीटर के इस ब्रिज का आठ सौ मीटर का हिस्सा सेतु निगम को बनाना था, जो दो साल पहले बनकर तैयार हो चुका है। जबकि, चार मीटर में काम रेलवे को करना था। लेकिन, साल दर साल गुजरते जा रहे हैं। काम पूरा नहीं हो पाया है। जन सहूलियत की ये योजना लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। निर्माण अधूरा होने की वजह से क्षेत्र का कारोबार बुरी तरह से प्रभावित बना हुआ है। 
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