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पथरीली जमीन पर टंकियां बनाने में आ रहीं दिक्कतें

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पथरीली जमीन पर टंकियां बनाने में आ रहीं दिक्कतें
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झांसी। पेयजल महानगर योजना के तहत 11 स्थानों पर टंकी (ओवर हैड टैंक) व एक जगह भूमिगत जलाशय (सीडब्लूआर) बनाने का काम शुरू हो गया है। मगर, सभी जगह जमीन की खुदाई में पत्थर निकलने से दिक्कत आ रही है। इससे काम भी तेजी से नहीं हो पा रहा है। इन स्थितियों में टंकी बनाने का काम वक्त पर पूरा नहीं हो पाएगा।
भारत सरकार की अमृत योजना के अंतर्गत झांसी पेयजल पुनर्गठन योजना के पहले चरण में महानगर के 13 जोन के कोछाभांवर, मेडिकल कॉलेज, करगुवां-गुमनावारा, तालपुरा, सिविल लाइन, मसीहागंज, आयुर्वेद कॉलेज, सिमरधा, भगवंतपुरा, नंदनपुरा और सिमराहा में काम शुरू हो गया है। इनमें जहां टंकी बननी हैं वहां दो मीटर गड्डा और भूमिगत जलाशय के लिए साढ़े तीन मीटर तक गड्डा होना है।
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इनमें तालपुरा, सीपरी बाजार और कोछाभांवर में पानी की टंकी बनाने का काम पत्थर निकलने से धीमा पड़ गया है। तीनों जगह 22 मीटर के ऊंचेे पिलर पर 2025 किलोलीटर की टंकी का निर्माण होना है। टंकियों के लिए ढाई से तीन मीटर गहरे गड्ढे खोदे जाने हैं, ताकि उनका बेस मजबूत हो सके। मगर, तीनों जगह पत्थर निकलने से गड्ढा खोदने में परेशानी आ रही है। इससे काम करने में वक्त लग रहा है। पत्थर को मशीनों से तोड़ने में पसीने निकल रहे हैं। सिविल लाइन में भूमिगत जलाशय के लिए जो जमीन दी गई वह तो पहाड़ी से सटी है। इससे पत्थर तोड़ने में दिक्कत ज्यादा आ रही है। अन्य स्थानों का भी यही हाल है। मालूम हो कि पेयजल महायोजना के काम की शुरुआत 15 जून 2018 को कोछाभांवर से हुई थी। काम पूरा करने का लक्ष्य 2020 तक बनाया गया है।
टंकी और भूमिगत जलाशय का जहां - जहां निर्माण चल रहा है उन सभी जगहों पर पत्थर निकल रहे हैं। इससे गड्ढा खोदने में परेशानी आ रही है, लेकिन इसके बाद काम में तेजी आ जाएगी। योजना वक्त पर ही पूरी होगी।
अमित कुमार, अधिशासी अभियंता पेयजल परियोजना
पहले चरण में होने वाले काम
पहले चरण में महानगर के 13 जोन (कोछाभांवर, मेडिकल कॉलेज, करगुवां-गुमनावारा, तालपुरा, सिविल लाइन, मसीहागंज, आयुर्वेद कॉलेज, सिलवर्ट गंज प्रेमनगर, सिमरधा, भगवंतपुरा, नंदनपुरा, सिमराहा और सागर गेट) में काम होना है। इसमें कोछाभांवर, मेडिकल कॉलेज और करगुवां-गुमनावारा को बराठा बेसिन योजना से पानी दिया जाएगा। बराठा बेसिन योजना में स्थापित छह ट्यूबवेल चालू करने के साथ ही दो नए ट्यूबवेल लगाए जा रहे हैं। बाकी दस जोन में माताटीला से आने वाली 110 एलएलडी क्षमता की पाइप लाइन से पानी पहुंचाया जाएगा। आठ जगह सीडब्लूआर (भूमिगत जलाशय), 12 टंकियां और 224 किलोमीटर क्षेत्र में पाइप लाइन डाली जानी है।
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दूसरे चरण में होने वाले काम
दूसरे चरण में शेष 16 जोन में पानी पहुंचाने के लिए माताटीला बांध से 195 एमएलडी क्षमता की पाइप लाइन से बबीना तक पानी लाया जाएगा। बबीना में बनने वाले नए जल शोधन संयंत्र से पानी को शुद्ध करने के बाद झांसी लाया जाएगा। माताटीला बांध पर एक सीपी टैंक, माताटीला से बबीना तक 24.50 किलोमीटर तक कच्चे पानी के लिए 1,700 मिलीमीटर व्यास की पाइप लाइन डालने के साथ ही जल शोधित पानी के लिए बबीना से झांसी तक 27.50 किलोमीटर की पाइप लाइन डाली जाएगी। 11 भूमिगत जलाशय (सीडब्लूआर), नौ टंकियां और 228 किलोमीटर क्षेत्र में पाइप लाइन डाली जाएगी। बबीना में जल शोधन संयंत्र लगाने के लिए जमीन चिह्नित कर ली गई है। यह काम अगस्त से शुरू होगा।
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