शताब्दी एक्सप्रेस पर शरारती तत्वों ने पहली बार पथराव नहीं किया है। इसके पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन रेलवे सुरक्षा एजेंसियां न तो इन घटनाओं को अभी तक रोक सकी हैं और न ही शरारती तत्व उनके हाथ आए हैं।
नई दिल्ली से हबीबगंज के बीच चलने वाली शताब्दी एक्सप्रेस देश की वीआईपी ट्रेनों में एक है। वातानुकूलित होने के कारण सभी कोचों की खिड़कियों पर कांच लगे हैं। साल में छह से आठ ऐसी घटनाएं जरूर सामने आ जाती हैं। पिछले महीने भी हबीबगंज से नई दिल्ली जाने वाली शताब्दी एक्सप्रेस पर कोटरा और सोनागिर स्टेशनों के बीच पथराव हुआ था। अधिकांश घटनाएं दतिया, डबरा और ग्वालियर के बीच होती हैं।
इस संबंध में आरपीएफ कमांडेंट आशीष मिश्रा ने बताया कि डबरा के आसपास शहरी आबादी है। झुग्गी झोपड़ियां बनी हुई हैं। यहां रहने वाले बच्चे पटरियों के आसपास खेलते हैं और इनमें ही कु शरारती कभी- कभार ट्रेन पर पत्थर फेंक देते हैं। आरपीएफ हमेशा इनके बीच जाकर लोगों को जागरूक करती हैं। यह समस्या लोगों को जागरूक करने से ही दूर हो सकती है, जिसके प्रयास लगातार जारी है। सोमवार को भी घटना के बाद उपनिरीक्षक देवी सिंह ने मौके पर पहुंचकर आसपास की बस्तियों में पहुंचकर लोगों से बातचीत की। साथ ही बताया कि ऐसा करना कानूनन अपराध है। पकड़े जाने पर कड़ी सजा का मिलती है। बच्चों को पटरी के आसपास खेलने से भी रोका गया।