एसएसपी बीबी जीटीएस मूर्ति ने शुक्रवार को बड़ा प्रशासनिक फेर बदल करते हुए कोतवाली समेत जनपद के 16 थानों के थानेदार बदल दिए। ग्रामीण इलाकों के अधिकांश थानेदारों को बदल दिया गया हालांकि अधिकांश थानेदारों को एक जगह से हटाकर दूसरी जगह की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
शुक्रवार को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी गश्ती के मुताबिक कोतवाली प्रभारी राजेश कुमार दुबे को हटाकर गुरसराय थाना प्रभारी एवं पुलिस लाइन से अंजन कुमार सिंह को कोतवाली का जिम्मा दिया गया है वहीं, गुरसराय थाना प्रभारी शैलेंद्र सिंह को सदर थाना प्रभारी बनाया गया है। निरीक्षक सरिता त्रिपाठी को लहचूरा से टहरौली का प्रभारी निरीक्षक नियुक्त किया गया है। उपनिरीक्षक सत्य प्रकाश शर्मा को शाहजहांपुर से लहचूरा, नवाबाद थाने के अतिरिक्त निरीक्षक अतुल कुमार लखेरा को शाहजहांपुर, निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह को प्रभारी निरीक्षक मोंठ बनाया गया है। निरीक्षक वेद प्रकाश पांडेय को पूछ से बड़ागांव तथा बलिराज शाही को बड़ागांव से चिरगांव थाना भेजा गया है। उपनिरीक्षक राहुल राठौर को चिरगांव से बबीना, निरीक्षक अखिलेश द्विवेदी को प्रभारी यूपी-112 से हटाकर गरौठा थाने का प्रभारी बनाया गया है। निरीक्षक सुरजीत सिंह को गरौठा से एरच तथा सत्येंद्र यादव को वीआईपी सेल से साइबर अपराध थाने का प्रभारी बनाया गया है। निरीक्षक जय प्रकाश को उल्दन से यूपी-112 का जिम्मा दिया गया है। उपनिरीक्षक अजय सिंह को पुलिस लाइन से उल्दन, उपनिरीक्षक सोवरन सिंह को सीपरी बाजार से एएचटी एवं महिला उपनिरीक्षक नीतू सिंह को पुलिस लाइन से महिला थाना का थानाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
गैर जनपद तबादला होने से हटे पांच प्रभारी
गैर जनपद तबादला हो जाने से तीन कटेरा थाना प्रभारी अमिराम सिंह, मोंठ थाना प्रभारी राजेश पाल सिंह, बबीना थाना प्रभारी विनय साहू, साइबर थाना प्रभारी अरविंद कुमार एवं महिला थाना प्रभारी वंदना सिंह को हटाया गया है।
वर्षों से थानों में जमे सिपाही बन गए कारखास
जनपद में पांच साल का कार्यकाल पूरा करने की वजह से पांच थाना प्रभारियों को हटा कर भले उनको गैर जनपद भेज दिया गया लेकिन, तकरीबन सभी थानों में वर्षों से जमे कारखास अभी तक नहीं हट सके। सिटी, मोंठ, टहरौली सर्किल के कई थानों में छह-छह साल से भी अधिक समय से सिपाही अभी तक जमे हुए हैं। कई साल से इनका तबादला न होने की वजह से यह सिपाही ही अब थानों के कारखास बन गए। थानों की बागडोर भी यह सिपाही संभाले हुए हैं। इन सिपाहियों की ओर अफसरों का कोई ध्यान नहीं है।