भारत निर्वाचन आयोग ने एक हजार पुरुषों पर 885 महिला मतदाताओं का मानक तय कर रखा है। लेकिन, जिले में आधी आबादी इस मामले में पिछड़ गई है। यहां एक हजार पुरुषों पर 859 महिला वोटर हैं। इस स्थिति में भी जनपद दो माह तक चलाए गए अभियान के बाद पहुंच पाया है।
विधानसभा चुनाव की आदर्श आचार संहिता की घोषणा कभी भी हो सकती है। ऐसे में निर्वाचन आयोग चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। जिले की वोटर लिस्ट फाइनल कर दी गई है, जो पांच जनवरी को जारी कर दी जाएगी। सूची में 14,32,435 वोटरों को शामिल किया गया है। इसमें 7,74,128 पुरुष व 6,58,249 महिला मतदाता हैं। यानी की जिले में 1000 पुरुष मतदाताओं पर 859 महिला मतदाता हैं। यह संख्या प्रदेश के मानक से 16 कम है। यही स्थिति भी 15 सितंबर से 15 नवंबर तक लगातार चलाए गए अभियान के बाद बन पाई है। वरना पहले महिला मतदाताओं की संख्या 850 ही थी। अभियान के दरम्यान स्कूल - कालेजों में छात्रों को वोटर बनने के लिए प्रेरित किया गया था। वोटर बनाने को विशेष कैंप भी आयोजित किए गए थे।
मऊरानीपुर आगे, बबीना फिसड्डी
महिला मतदाताओं की संख्या के मामले में जिले की चारों विधानसभाओं में मऊरानीपुर सबसे बेहतर स्थिति में है। यहां एक हजार पुरुषों पर 877 महिला वोटर हैं। जबकि, सबसे कम महिला मतदाता बबीना विधानसभा में हैं। यहां एक हजार पुरुषों पर महज 847 महिला वोटर ही हैं। वहीं, झांसी में 853 तथा गरौठा विधानसभा में 856 महिला मतदाता हैं।
गहरी हो रही है लिंगानुपात की खाई
जिले में लिंगानुपात की खाई लगातार गहराती जा रही है। इसका अंदाजा जनसंख्या के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। सन 1991 की जनगणना में यहां एक हजार पुरुषों पर 921 महिलाएं थीं। इसके बाद 2001 की जनगणना में यह आंकड़ा घटकर 887 ही रह गया। इसके बाद सन 2011 में यह घटकर 859 पर आ पहुंचा। यानी, विगत तीन दशकों में प्रति हजार पुरुषों के मुकाबले 72 महिलाएं कम हो गईं।
इसलिए बिगड़ा आंकड़ा
झांसी व बबीना कैंट क्षेत्र में महिला मतदाताओं के मुकाबले पुरुष मतदाताओं की संख्या कहीं अधिक है। यहां काफी संख्या में आर्मी के जवान बगैर परिवार के रहते हैं। जिले में महिला मतदाताओं का औसत कम होने की यह एक बड़ी वजह है। इसमें सुधार के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान चलाकर ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को वोटर बनाया गया है।
- रमाशंकर गुप्ता, उप जिला निर्वाचन अधिकारी /एडीएम
हो रहा है सुधार
महिलाओं की संख्या में सुधार के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। भ्रूण जांच की निगरानी हो रही है। इसके अलावा लोगों की सोच में भी परिवर्तन आया है। लड़का - लड़की का भेद खत्म होता जा रहा है। इससे लिंगानुपात की स्थिति में सुधार आया है। यह संख्या प्रति हजार पर लगभग नौ सौ के औसत पर पहुंच गई है। सही आंकड़ा अभी उपलब्ध नहीं है।
- डा. विनोद यादव, मुख्य चिकित्साधिकारी