झांसी। महानगर में नगर निगम के दायरे में आने वाले क्षेत्र में सवा तीन सौ की आबादी पर एक सफाई कर्मचारी तैनात हैं। वाहनों की भी बड़ा बेड़ा है, लेकिन कचरा निस्तारण के लिए कोई माकूल व्यवस्था नहीं है। इस कारण शहर में जगह-जगह गंदगी फैली रहती है। नगर निगम के कर्मचारी कूडा कचरा को अपने हिसाब से उठाते हैं। नालियां बजबजा रही हैं। एक अनुमान के अनुसार शहर से रोजाना तीन सौ टन कचरा निकलता है जो डंपिंग जोन में भेजा जाता है। इससे वहां भी बड़े ढेर लगते जा रहे हैं।
नगर निगम के दायरे में 60 वार्ड आते हैं, जिसमें पांच लाख से अधिक की आबादी है। इन सब की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी 1600 कर्मचारियों की है। इनमें से मात्र 280 कर्मचारी स्थायी हैं। जबकि, 740 आउटसोर्स तथा 580 संविदा कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियों पर क्षेत्र में कचरा कंटेनरों, नाली, सड़क सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने का जिम्मा है। इसके बाद भी व्यवस्था बदहाल है। महानगर में चाहे बड़ाबाजार के आगे का मामला हो या फिर सूजे खां खिड़की। व्यवस्था बदहाल है। गंदगी से निकलना मुश्किल है। यहां कचरे के ढेर लगे रहते हैं। वैसे, विभाग का दावा है कि रोजाना कचरा को दो डंपिंग जोन मैला की टोरिया और पंचवटी पर डंप किया जाता है।
दूसरी ओर डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन के लिए एक प्राइवेट कंपनी को जिम्मेदारी दी गई है। इसके एवज में प्रत्येक घर से 40 रुपये वसूले जाते हैं। घर से एकत्र किया जाने वाला सूखा और गीता कचरा अलग-अलग एकत्र किया जाना चाहिए, पर ज्यादातर कर्मचारी ऐसा नहीं कर रहे हैं। बस, कचरा एकत्र कर डंपिंग जोन में डंप कर रहे हैं। कचरा को पूर्ण रूप से निस्तारित करने के लिए अभी तक नगर निगम के पास कोई उचित व्यवस्था नहीं हैं। अगर यही व्यवस्था रही तो आने वाले समय में कचरे का पहाड़ शहर में नजर आएगा।
नगर निगम के पास ये है व्यवस्था
- लोडर गाड़ी - 07
- एलएनटी- 05
- डंपर बड़ा (ट्रिपर) - 17
- डंपर ट्रिपर ओपन - 02
- डंपर बड़ा (प्लेसा) - 08
- ट्रिपर छोटी - 25
- छोटी डीपी - 02
- ट्रेक्टर- 21
- रोबोट - 03
- जेट क्लीनर - 03
- कैटल कैचर- 01
- सैप्टिक टैंक क्लीनर (छोटे-बड़े)- 03
- टावर वैगन लिफ्टर (बड़ी) - 04
- टावर वैगन लिफ्टर (छोटी) - 05
- रोड स्वीपिंग - 01
- रोड स्वीपिंग ट्रैक्टर - 01
- नाला सफाई मशीन - 01
- आरसी मशीन - 01
- जेसीबी - 30
ऐसे हो रहा निस्तारण
कचरा एकत्र करने के लिए कई स्थानों पर कचरे के कंटेनरों की व्यवस्था है। लेकिन, कचरा उठाने के बजाय उसमें आग लगाकर कचरा निस्तारित करने का काम हो रहा है। यही हाल डंपिंग जोन का है। कचरे का पूर्ण रूप से निस्तारण न होने पर वहां भी आग लगाई जाती है। लेकिन, हर बार नगर निगम के अधिकारियों का मानना होता है कि वहां पर अज्ञात लोगों की तरफ से आग लगाई जाती है।
डंपिंग जोन पर सख्त पहरा
मैला की टोरिया पर डंपिंग जोन में लगातार लगने वाली आग के मामले में नगर निगम ने सख्त कदम उठाते हुए वहां उचित व्यवस्था कर रखी है। स्वास्थ्य अधिकारी राकेश बाबू ने बताया कि डंपिंग जोन में आग न लगे इसके लिए वहां पर प्रेशर मशीन, एक जेसीबी, दो सफाई कर्मचारी और दो गार्ड को तैनात किया गया है। जो आग लगने पर तत्काल उस पर काबू करने का काम करेंगे तथा आग लगाने वालों पर सख्त कार्रवाई करेंगे।
सफाई व्यवस्था के लिए पर्याप्त कर्मचारी है, जो सफाई व्यवस्था की कमान संभाले हुए हैं। रोजाना क्षेत्रों में कर्मचारी वाहनों के लिए कचरा एकत्र कर वाहनों के जरिये डंपिंग जोन तक पहुंचा रहे हैं। - डा. राकेश बाबू गौतम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी