महानगर को गंदगी से मुक्त करने के लिए नगर निगम बड़े इंतजाम करने का दावा कर रहा है, लेकिन सारी व्यवस्थाएं अफसरों के इलाके तक सीमित हैं। नगर निगम क्षेत्र के सिविल लाइंस क्षेत्र में सफाई और कूड़ा उठाने के लिए सफाई कर्मचारियों और कंपनी को जिम्मा सौंपा गया है। जबकि महानगर के तमाम अन्य क्षेत्र सफाई कर्मचारियोें के हवाले हैं। नगर निगम ने सफाई कार्य के लिए महानगर के 60 वार्डों को 10 सर्किलों में बांटा है। निगम के नौ सर्किलों में करीब 100 सफाई कर्मचारियों के जरिए सफाई कराई जाती है। जबकि सर्किल तीन के सिविल लाइंस क्षेत्र की 30 हजार की आबादी पर 170 सफाई कर्मचारी तैनात हैं। इसके साथ ही यहां कूड़ा उठाने के लिए डोर टू डोर कूड़ा संकलन के अलावा एक अन्य कंपनी को जिम्मा सौंपा गया है। वहीं इस क्षेत्र में अधिकारियों के निवास और कार्यालय अधिक हैं। बताया जाता है कि अफसरों के इलाके में सफाई व्यवस्था दुरुस्त रहे, इसलिए यहां सफाई पर जोर रहता है। सिविल लाइंस क्षेत्र में नगर निगम के वाहन सबसे ज्यादा दौड़ते नजर आते हैं। जबकि अन्य सर्किलों में केवल सफाई कर्मचारियों के जरिए सफाई कराई जाती है और कंपनी कूड़ा उठाती है। ऐसे में महानगर में बेहतर सफाई व्यवस्था के दावे फेल नजर आ रहे हैं। सफाई मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष अशोक प्याल का कहना है कि सफाई कर्मचारी बेहतर ढंग से सफाई व्यवस्था को अंजाम देते हैं। लेकिन सिविल लाइंस क्षेत्र में सफाई कर्मियों के अतिरिक्त कंपनी को जिम्मा सौंपा गया है। जिस पर निगम हर माह पांच लाख रुपये खर्च कर रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए। सफाई निरीक्षकों पर अतिरिक्त भार महानगर में सफाई व्यवस्था की निगरानी को तैनात सफाई निरीक्षकों की तैनाती में भी असमानता है। आठ सफाई निरीक्षकों में तीन पर 12 वार्ड, दो पर छह, दो पर पांच और एक सफाई निरीक्षक पर दो वार्ड हैं। ऐसे में अतिरिक्त कार्यभार रहने के चलते सफाई व्यवस्था प्रभावित होती है। सफाई व्यवस्था को लेकर सिविल लाइंस क्षेत्र को कई साल पहले विशेष क्षेत्र के तौर पर चयनित किया गया था। जल्द ही उच्चाधिकारियों से वार्ता कर नए सिरे से सफाई कर्मचारियोें की तैनाती और व्यवस्था में सुधार करने की पहल की जाएगी। अरुण कुमार गुप्त, अपर नगर आयुक्त