प्रदेश में सत्ताधारी पार्टी में चल रही उठापटक के कारण झांसी में दो खेमे में बंटी नजर आ रही समाजवादी पार्टी की स्थिति यह हो गई है कि कोई टिकट बचाने की कोशिश में जुटा है तो कोई टिकट काटने के लिए सक्रिय हो गया है। इस कारण समाजवादी पार्टी का चुनाव प्रचार ठंडा पड़ गया है।
समाजवादी पार्टी के दो धड़े हो जाने से जहां एक ओर पार्टी से जुड़े युवा मुख्यमंत्री के हर निर्णय के साथ नजर आ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर ऐसे समाजवादी नेता भी हैं, जिनकी निष्ठा मुलायम सिंह यादव के साथ है। जिले में घोषित किए गए विधानसभा के प्रत्याशी इसी कवायद में जुटे हुए हैं। पार्टी के सीनियर नेता खुलकर बोलने को तैयार नहीं हैं, वह केवल इतना कह रहे हैं कि वह समाजवादी पार्टी के साथ हैं। लेकिन, टिकट को लेकर चल रहा असमंजस इतना बढ़ गया है कि इससे घोषित टिकटों पर भी खतरा मंडराने लगा है। समाजवादी पार्टी दो फाड़ तो हो गई है। अब चुनाव चिह्न की लड़ाई चल रही है। ऐसे में झांसी सीट के टिकट पर असमंजस बढ़ गया है।
राजनीतिक दल के नेताओं ने लखनऊ में डेरा डाल दिया है। वह कुछ भी कहने से बच रहे हैं। यदि पार्टी में दो फाड़ होता है तो घोषित प्रत्याशी किस खेमे के साथ होंगे, यह कहना बड़ा मुश्किल है। घोषित प्रत्याशी एक गुट में रहेंगे तो दूसरा गुट नया प्रत्याशी घोषित करेगा। इससे चुनाव के समीकरण बदलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष छत्रपाल सिंह यादव ने कहा कि पार्टी पूरी तरह से एक है। इसमें किसी तरह की गुटबाजी नहीं है। जहां तक टिकट की बात है तो हाईकमान का फैसला मान्य होगा। झांसी से विधानसभा प्रत्याशी दीपमाला कुशवाहा ने कहा कि अभी कन्फ्यूजन है, इसलिए इंतजार किया जा रहा है। कुछ भी कहना बड़ा मुश्किल है।