ख्यमंत्री अखिलेश यादव के बबीना विधानसभा से चुनाव लड़ने की संभावना के चलते यह क्षेत्र इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा में है। मुख्यमंत्री ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव को सौंपी 360 उम्मीदवारों की सूची में खुद का नाम बबीना विधानसभा क्षेत्र से प्रस्तावित किया है। हालांकि, इस सीट से अब तक सपा ने केवल एक बार ही जीत दर्ज की है, लेकिन पिछले दो चुनावों में पार्टी यहां से मुख्य मुकाबले में रही है। इससे पहले चार बार कांग्रेस, तीन बार भाजपा, तीन बार बसपा, एक बार जनसंघ और एक बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है।
बबीना में सपा का पहली बार परचम रतनलाल अहिरवार ने 2002 में फहराया था। वह भाजपा छोड़ सपा में शामिल हुए थे। उन्होंने बसपा के तिलक चंद्र अहिरवार को मात दी थी। लेकिन, 2007 के चुनाव में सपा यहां से दूसरे स्थान पर रही। इस चुनाव में रतनलाल हाथी पर सवार हो गए थे। उन्होंने सपा के सतीश जतारिया को शिकस्त दी थी। 2012 के चुनाव में भी सपा दूसरे स्थान पर रही। इस चुनाव में जीत बसपा के कृष्णपाल राजपूत ने दर्ज की।
हालांकि, बबीना में सपा भले ही एक बार जीती होे, परंतु लोधी, कुशवाहा व यादव बहुल इस सीट पर पार्टी का अच्छा वोट बैंक माना जाता है। फिलहाल सपा ने इस सीट सेे श्यामसुंदर सिंह को उम्मीदवार बनाया है। सीएम के इस सीट से उतरने से समीकरण पलट सकते हैं। बुंदेलखंड की अन्य सीटें भी प्रभावित हो सकती हैं। जाहिर है कि तब अन्य प्रमुख दल भी अपनी रणनीति नए सिरे तय करेंगे। वह भी अपने दिग्गज नेताओं को उतार सकते हैं।
यह रहा रिपोर्ट कार्ड
1967 के पहले बबीना विधानसभा ललितपुर विधानसभा का हिस्सा हुआ करती थी। 1967 में पहली बार अलग बबीना विधानसभा सीट पर चुनाव हुआ। अब तक यहां विधानसभा के तेरह चुनाव हो चुके हैं, जिसमें सबसे ज्यादा चार बार कांग्रेस ने 1967, 1969, 1980 व 1985 में जीत दर्ज की। भाजपा ने तीन चुनाव 1989, 1991 व 1993 में जीते। बसपा तीन बार 1996, 2007 व 2012 में जीती। सपा ने एक चुनाव 2002 में जीता। 1974 का चुनाव भारतीय जनसंघ व 1977 का जनता पार्टी के नाम रहा था।
कृषि आधारित है बबीना
बबीना विधानसभा की आबादी 5,15,576 है। इनमें 3,22,984 मतदाता हैं। क्षेत्र की बड़ी आबादी कृषि पर आधारित है। कस्बे से लगी हुई सेना की बड़ी छावनी है। क्षेत्र में वन्य क्षेत्र का बड़ा हिस्सा है। यह विधानसभा क्षेत्र झांसी के इर्दगिर्द फैला है। बबीना विधानसभा क्षेत्र में ललितपुर रोड पर बबीना कस्बा, शिवपुरी रोड रक्सा, कानपुर रोड पर चिरगांव कस्बा है। बरुआसागर, बड़ागांव जैसे छोटे कस्बे भी बबीना में हैं। कारोबार के नाम पर क्षेत्र में छोटी - बड़ी दुकानें भर ही हैं।
बदलता रहा वोटरों का मिजाज
बबीना विधानसभा चुनाव में शुरुआत से ही वोटरों का मिजाज बदलता रहा। पहले दो चुनावों में वोटरों ने कांग्रेस पर भरोसा जताया। इसके बाद अगले दो चुनावों में जनता पार्टी और जनसंघ का साथ दिया। इसके बाद फिर दो बार कांग्रेस को मिला। लेकिन, इसके बाद के लगातार तीन चुनाव वोटरों ने भाजपा के नाम किए। 2002 में पहली बार बबीना में सपा जीती। लेकिन, अगले चुनाव में वोटरों ने अपना फैसला बदल दिया। पिछले दो चुनाव बसपा के नाम रहे।
अखिलेश को चुनौती
अखिलेश यादव यदि बबीना विधानसभा से चुनाव लड़ते हैं, तो उनकी जमानत जब्त होगी। यहां तक कि इस सीट से सीएम के पिता मुलायम सिंह तक नहीं जीत सकते हैं। प्रदेश का आने वाला चुनाव बसपा के नाम रहने वाला है।
- कृष्णपाल राजपूत, बसपा विधायक - बबीना
सपा जीतेगी, बाकी की होगी जमानत जब्त
मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंड के लिए बहुत काम किया है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के बबीना विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने पर अन्य सभी दलों के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो जाएगी। सपा को इसका लाभ बुंदेलखंड की अन्य सीटों पर भी मिलेगा। सपा सभी जगह जीतेगी।
- छत्रपाल सिंह यादव, जिलाध्यक्ष - सपा
पांच साल का हिसाब लेगी जनता
मुख्यमंत्री के बबीना से चुनाव लड़ने पर जनता उनसे पांच साल का हिसाब लेगी। सपा शासन में बबीना क्षेत्र उपेक्षित रहा है। यहां कोई काम नहीं किया गया है। विश्वास है कि वह यहां से हार कर ही जाएंगे।
- राजीव सिंह पारीछा, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य
नहीं जीतेंगे अखिलेश
बबीना विधानसभा से अखिलेश यादव की जीत असंभव है। जनता सपा को पूरी तरह से नकार चुकी है। केंद्र की कांग्रेस सरकार में बबीना क्षेत्र में बहुत काम हुआ है। कांग्रेस यहां जीत दर्ज करेगी।
- चंद्रशेखर तिवारी, जिलाध्यक्ष - कांग्रेस