झांसी। स्त्री एवं प्रसूति रोगों के आयुर्वेदिक उपचार को एकरूप और मानकीकृत करने की दिशा में झांसी में महत्वपूर्ण पहल हुई है। केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) में देशभर से जुटे स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञों ने उपचार की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और प्रैक्टिस गाइडलाइन तैयार की। इसे आयुष मंत्रालय के स्तर से देशभर में लागू किया जाएगा।
सीएआरआई के प्रभारी सहायक निदेशक डॉ. रवींद्र सिंह ने बताया कि एसओपी तैयार करने का उद्देश्य स्त्री एवं प्रसूति रोगों के आयुर्वेदिक उपचार की प्रक्रियाओं को मानकीकृत करना है। इसमें आयुर्वेद के उपलब्ध शास्त्रीय ग्रंथों के साथ वर्तमान चिकित्सा पद्धति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के लंबे नैदानिक अनुभव और सुझावों को भी गाइडलाइन में जगह दी गई है।
केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद (सीसीआरएएस), नई दिल्ली के महानिदेशक प्रो. (वैद्य) रबीनारायण आचार्य ने कहा कि नैदानिक प्रक्रियाओं का मानकीकरण समय की जरूरत है। इससे आयुर्वेद में प्रमाण-आधारित नैदानिक अभ्यास को और मजबूत किया जा सकेगा। देश के विभिन्न संस्थानों से आए विशेषज्ञों के अनुभव और सुझावों को एसओपी तैयार करने में शामिल किया गया है।
बैठक में एआईआईए गोवा की डॉ. सुजाता कदम, आईएमएस बीएचयू वाराणसी की डॉ. दीपा मिश्रा, जामनगर गुजरात की डॉ. लक्ष्मीप्रिया देई, एनआईए जयपुर की डॉ. भारती कुमारमंगलम, ओडिशा की डॉ. सुदेशना मेहेर, गुजरात के डॉ. अशोकन वी., हैदराबाद की डॉ. सुनीता जोशी, एआईआईए नई दिल्ली की डॉ. कामिनी धीमान (ऑनलाइन) और कर्नाटक की डॉ. ममता केवी उडुप्पी समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल हुए।कार्यक्रम का संचालन अनुसंधान अधिकारी (आयुर्वेद) डॉ. नीलम सिंह ने किया।