झांसी। महानगर के युवा हॉकी खिलाड़ी शिवम आनंद ने झांसी का नाम रोशन किया है। शुरूआत में परिवार में आर्थिक तंगी होने के कारण पिता ने मंदिरों में भजन गाकर दक्षिणा में मिले पैसों से बेटे के लिए संसाधन जुटाए। बेटे ने भी ऊंचा मुकाम हासिल कर कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक हासिल कर उनका गौरव बढ़ाया।
आशिक चौराहा निवासी केशवानंद कुशवाहा घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भजन गाते थे। इससे मिलने वाली दक्षिणा से ही अपने परिवार का भरण पोषण करते थे। उनका बेटा शिवम आनंद बचपन से ही हॉकी खेल में रुचि रखता था। शुरूआत में उसने मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में अभ्यास शुरू किया। लेकिन आर्थिक तंगी होने के कारण शिवम ने हॉकी खेल का त्याग कर कामधंधा करने का सोची तो पिता ने बेटे को काम करने से मना किया।
इस दौरान पिता ने घरों और प्रतिष्ठानों के साथ ही मंदिरों में भजन गाना शुरू कर दिया। भजन में मिलने वाली दक्षिणा से बेटे की खेल संबंधी जरूरतों को पूरा किया। बेटे ने भी अभ्यास को दोगुना करते हुए राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जगह बनाने के साथ ही रेलवे में नौकरी पाई।
शिवम ने कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने के साथ ही वर्ष 2016 में बांग्लादेश, 2018 में बैंकॉक स्वर्ण पदक एवं अर्जेंटीना में सिल्वर मेडल हासिल किया। वहीं 2019 स्पेन में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। वर्ष 2022 में दिल्ली में आयोजित नेशनल हॉकी चैंपियनशिप में शिवम ने गोल्ड मेडल हासिल किया है।