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सोमवती अमावस्या पर करें पूर्वजों की आराधना, सूर्य ग्रहण का नहीं रहेगा प्रभाव

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झांसी। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष 14 दिसंबर को सोमवती अमावस्या मनाई जाएगी। मान्यता है कि इस दिन पूर्वजों की पूजा की जाती है। इससे व्यक्ति पितृदोष से मुक्त हो जाता है। भगवान शिव एवं भगवान विष्णु को समर्पित सोमवती अमावस्या पर हजारों श्रद्धालु पवित्र नदियों में स्नान कर दान करते है। चित्रकूट में भी भगवान कामतानाथ करने के लिए दर्शन को जाते है। खास बात यह है कि सोमवती को सूर्य ग्रहण भी है। लेकिन इसका कोई धार्मिक प्रभाव भारत में नहीं है।
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सनातन धर्म में धार्मिक एवं ज्योतिष मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या का बड़ा महत्व है। इस पवित्र तिथि पर पितृ एवं देवताओं की पूजा अहम है। ज्योतिषविद् पंडित अशोक तिवारी के अनुसार सोमवती अमावस्या पर पूर्वजों की पूजा से स्वास्थ्य लाभ, दांपत्य जीवन में मधुरता, संतान सुख आदि की प्राप्ति होती है। इस दिन पीपल वृक्ष की पूजा का भी विधान है। इधर ज्योतिषविद् पंडित शांतनु पांडेय ने बताया कि अमावस्या की तिथि 13 दिसंबर को रात 11:55 बजे से लग जाएगी। जो सोमवार 14 दिसंबर को रात 9:53 बजे तक रहेगी। वहीं, रात 7:03 बजे से सूर्य ग्रहण शुरू हो जाएगा, जो मध्य रात्रि 12:23 तक रहेगा। हालांकि सूर्य ग्रहण का कोई प्रभाव नहीं है। ग्रहण के किसी प्रकार का नियम एवं सूतक मान्य नहीं होगा। उनके अनुसार इस दिन श्रद्धालु पूर्वजों की पूजा करते है। उन्हें स्मरण कर दान करते है। चित्रकूट में भगवान कामतानाथ के दर्शन करते है।
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