झांसी। झांसी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। नगर
निगम के साठ वार्डों के पार्षदों से आम सहमति का प्रस्ताव मांगा गया है।
साथ ही मेयर ने शर्तों में कुछ छूट देने के लिए केंद्रीय मंत्रियों को पत्र
लिखा है।
स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कागजी तैयारियों के अलावा अधिकारी व
जनप्रतिनिधि भी सक्रिय हो गए हैं।
साठ वार्डों के पार्षद अपने- अपने
वार्डों में गणमान्य व्यक्तियों के साथ बैठक कर स्मार्ट सिटी की जानकारी
देंगे। उनसे निर्धारित प्रारूप पर सहमति लेंगे। इस दौरान वह बैठक की
फोटोग्राफी भी कराएंगे। पार्षदों की सहमति प्रस्ताव मिलने के बाद उसे शासन
को भेजा जाएगा। महापौर किरन वर्मा ने बताया कि शासन की मंशा के अनुरूप
निर्धारित प्रारूप तैयार करा लिया गया है। सभी वार्डों के पार्षदों को
वितरित कराने की कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। साथ ही केंद्रीय मंत्री
वैकेया नायडू व उमा भारती को पत्र लिख कर शर्तों में कुछ छूट देने की मांग
की है।
पत्र में बताया है कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई झांसी की
वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई ने वर्ष 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ प्रारंभ
की थी। झांसी महानगर बुंदेलखंड की एक मात्र नगर निगम है, जो ऐतिहासिक
धरोहरों से परिपूर्ण है। बुंदेलखंड उप्र राज्य में सबसे पिछड़ा क्षेत्र है
और भारत वर्ष की ह्रदय स्थली है। दक्षिण भारत की ओर जाने वाले रेल मार्ग का
प्रमुख जंक्शन है। पूर्व की सरकारों द्वारा महानगर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
के अनुरूप योजनाएं स्वीकृत नहीं हो सकीं, इस कारण झांसी महानगर विकास नहीं
कर सका है।
भारत सरकार द्वारा स्मार्ट सिटी योजना शुरू की गई है, जिसमें
उप्र से 13 शहरों का चयन किया जाना है। स्मार्ट सिटी में सरकार द्वारा नियत
प्रारूप के अनुरूप महानगर अपनी योग्यता रखता है, परंतु संभव है कि झांसी
का चयन न हो सके क्योंकि झांसी नव सृजित नगर निगम के साथ जेएनएनयूआरएम से
आच्छादित नहीं है। ऐसे में कुछ छूट प्रदान की जाए।
वहीं, नगर आयुक्त
अरुण प्रकाश ने बताया कि स्मार्ट सिटी बनने के लिए निर्धारित शर्तों को
झांसी लगभग पूरा कर रहा है। संभावना है कि इस परीक्षा में पास होंगे। मालूम
हो कि प्रथम चरण में चार स्मार्ट सिटी का चयन किया जाना है।