झांसी। मेडिकल कॉलेज परिसर स्थित पोस्टमार्टम हाउस मंगलवार की दोपहर दो बहनों की चीखों से गूंज उठा। दोनों के सामने 15 दिन से लापता भाई का शव पड़ा था। काफी खोजबीन के बाद भी उसका पता नहीं चल रहा था। जानकारी होने पर बहनें कांपते कदमों से पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं। यहां भाई के शव को देखकर उनके मुंह से चीखें निकल गईं।
बड़ागांव गेट अंदर शंकर सिंह का बगीचा निवासी मनीष शर्मा अपनी मां सावित्री के साथ रहता था। वह एक प्रिंटिंग प्रेस में काम करता था। 15 दिन से वह घर नहीं पहुंचा था। इस पर परिजन उसकी तलाश में जुटे थे, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल रहा था। मंगलवार सुबह ललितपुर और ओरछा में रहने वाली उसकी बहनें संगीता और चंचल को भाई का शव पोस्टमार्टम हाउस में रखे होने की जानकारी हुई। इस पर वह अपनी ससुराल से मेडिकल पहुंच गईं। पहले तो उनकी हिम्मत पोस्टमार्टम हाउस में दाखिल होने की नहीं हुई, लेकिन, किसी तरह कांपते कदमों से वह अंदर पहुंची। यहां सामने भाई का शव देखकर उनकी चीखें निकल गईं। दोनों बहनें निढाल होकर वहीं गिर पड़ीं। यहां काफी देर तक उनका विलाप चलता रहा। किसी तरह वहां मौजूद लोगों ने उन्हें ढांढस बंधाया।
बहन चंचल ने बताया वह तीन बहनें हैं। तीनों की शादी हो चुकी है। उनका एक भाई कई सालों से लापता है। जबकि, मनीष पिछले 15 दिनों से घर नहीं आया था। मंगलवार सुबह पता चला कि वह चार दिन से मेडिकल कॉलेज में भर्ती था। यहां इलाज के दौरान सोमवार रात उसकी मौत हो गई। बहन ने बताया कि एक भाई पहले से ही उनसे दूर चला गया है। जबकि, अब दूसरे ने भी उनका साथ छोड़ दिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव बहनों के हवाले कर दिया गया।