ओरछा। सोलहवीं सदी में स्थापित ओरछा नगर के जहांगीर महल के दक्षिणी भाग में इन दिनों खोदाई के साथ अनुरक्षण का काम चल रहा है। पिछले आठ महीने से चल रही इस खोदाई में 22 महलों के अवशेष और दरबारियों की बस्तियों की संरचनाएं मिली हैं। इसके अलावा बगीचे और सड़कों के साथ-साथ पुरातन काल की अन्य सामग्री भी मिली है।
आेरछा के पुरातत्व अधिकारी घनश्याम बाथम व इंजीनियर राघवेंद्र तिवारी व उनकी टीम इस पुरातात्विक धरोहर को सहेजने में लगी है।
आेरछा राजा-महाराजाआें की नगरी रही है। यहां खोदाई के दौरान घरों में उपयोग में आने वाले मिट्टी के बर्तन, सिलचक्की, रसोई घर, अनाज रखने के पात्र, बच्चों के मिट्टी के खिलौने एवं बावड़ियाें और मंदिर के अवशेष मिले हैं। जिससे यह कहा जा सकता है कि यहां पर लोग पूर्व में व्यवस्थित तरीके से रहा करते थे। यहां पर मिल रहे अवशेषों से स्पष्ट होता है कि यह पूरा निर्माण एक सुरक्षित क्षेत्र रहा होगा। जहां राजकीय काम को करने वाले लोगो की बस्ती थी। वहीं जहांगीर महल के बगल में और राजा महल के पास बेतवा नदी के तट पर खोदाई में निकले इन खंडहरों को राजा के दरबारियों की बस्ती के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्री, वजीर एवं सूबेदारों की एक कॉलोनी भी दिख रही
बताते हैं कि कई अवशेष मिलने से यहां पर मजदूरों से बहुत ही सावधानी से खोदाई कराई गई थी। खोदाई में यहां पर बस्तियों के अवशेष पुराने महल जैसे आलीशान मकानों के अवशेष के साथ ही सड़क भी मिली। साथ ही उस समय के मिट्टी और टेराकोटा के बर्तनों के साथ ही अन्य चीजें भी यहां पर मिल चुकी है। इसे देखकर पता चलता है कि उस समय भी ओरछा राज्य को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए राजा द्वारा अपने मंत्री, वजीर एवं सूबेदारों की एक कॉलोनी बनाकर रखा गया होगा। इससे सभी की सुरक्षा में सुविधा होती होगी।
खोदाई के दौरान 22 खंडहरों की संरचनाएं मिली हैं। किला परिसर के 800 मीटर से अधिक के क्षेत्र में खोदाई और सफाई का काम किया जा चुका है।
शिल्पा गुप्ता, आयुक्त पुरातत्व विभाग