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एक लाख किसानों को सिंचाई के लिए नहीं मिल पा रहा पानी

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झांसी। रबी की बुवाई शुरू होने के बाद भी अब तक गुरसराय नहर का संचालन शुरू नहीं हुआ है। इससे इस नहर पर आश्रित एक सैकड़ा से अधिक गांवों के एक लाख किसान पानी की कमी से पलेवा नहीं कर पा रहे हैं। बुवाई में देरी होने की वजह से किसानों को फसल भी देर से तैयार होने का खतरा सता रहा है, जिसका असर उत्पादन पर भी पड़ सकता है। इससे किसानों में आक्रोश है।
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बेतवा नहर प्रखंड की गुरसराय नहर से गढ़बई और वसा माइनर निकली है। जबकि, गुरसराय से पहले अनेक माइनर निकली हैं। गुरसराय मुख्य नहर से उत्तर की ओर जुड़ी गढ़बई रजबहा, अस्ता माइनर, परसुवा माइनर, रियां माइनर, जखौरा माइनर से सैकड़ों गांवों के किसानों को पानी पहुंचता है। गुरसराय नहर से दक्षिण की ओर निकली वसा माइनर से दर्जनों गांवों के किसानों को पानी मिलता है। यह नहर क्षेत्र की अस्सी फीसदी यानी आठ हजार एकड़ से अधिक जमीन को सिंचित करती है। इससे एक लाख से अधिक किसान लाभान्वित होते हैं। तय शिड्यूल के अनुसार गुरसराय नहर प्रखंड की इस नहर का संचालन 15 अक्तूबर से प्रारंभ होना था। इसी के अनुसार किसानों ने रबी सीजन में पलेवा की तैयारियां कर ली थीं, लेकिन विभाग एक पखवाड़े का विलंब होने के बाद भी नहर में पानी नहीं छोड़ पाया है। इससे रबी की बुवाई में देरी हो गई है। शुरुआत की इस देरी की वजह से फसल भी देर से पककर तैयार होगी, इससे किसानों को उत्पादन में कमी की आशंका है।
पलेवा का समय गुजरा जा रहा है और नहर का संचालन अब तक नहीं हुआ है। जबकि, क्षेत्र के ज्यादातर खेतों की सिंचाई का यही एकमात्र जरिया है। बावजूद, ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
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- सूरज माते, खिरिया
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की बात तो कहती है, लेकिन हकीकत इससे इतर है। इसका अंदाजा गुरसराय नहर को देखकर लगाया जा सकता है, जिसमें संचालन अब तक शुरू नहीं हुआ है।
- जगराम सिंह, अस्ता
गुरसराय व गरौठा कृषि आधारित क्षेत्र हैं। यदि किसान को सिंचाई के लिए समय से पानी नहीं मिला तो किसान कैसे अपनी बुवाई करेंगे। वैसे भी किसान कोरोना काल में टूटा है।
- राकेश यादव, पूर्व प्रधान फ रीदा
सरकार आत्मनिर्भरता की बात कहती है और किसान हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। यदि नहर ही चालू नहीं होगी तो किसान कैसे आत्मनिर्भर होगा। समस्या के निराकरण के लिए प्रशासन को पहल करनी चाहिए।
- राजेश कुमारी
इस वर्ष गरौठा क्षेत्र में बारिश बहुत कम हुई है। किसान पूरी तरह से नहर के पानी पर ही आश्रित हैं। नहर में तत्काल पानी छोड़ा जाना चाहिए, ताकि किसान बुवाई शुरू कर सकें।
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- हरिओम फौजी
तत्काल नहर फु ल गेज से चलाकर किसानों को राहत पहुंचाना चाहिए। ताकि किसान खेतों की सिंचाई कर बुवाई कर सकें। देरी किसानों पर भारी पड़ सकती है।
- कृष्णपाल सिंह सेंगर
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