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भ्रष्टाचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में पुलिस को लग गए 55 दिन

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झांसी। सिंचाई विभाग में 77.35 लाख रुपये के घपले के आरोप में तत्कालीन एक्सईएन समेत नौ के खिलाफ नवाबाद थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई। हालांकि आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने में पुलिस को पूरे 55 दिन लग गए। लेटलतीफी के साथ मामला दर्ज करने के बाद पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है। तत्कालीन एक्सईएन, लेखाधिकारी एवं कैशियर को शासन के निर्देश पर पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
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बेतवा प्रखंड के तत्कालीन एक्सईएन संजय कुमार ने पिछले सीजन में नहरों की सफाई एवं मरम्मत कार्य कराए बिना छह फर्मों के बीच 77.35 लाख की मोटी धनराशि बांट दी। आरोपी एक्सईएन ने संबंधित फर्मों से एग्रीमेंट तक करने की जरूरत नहीं समझी। अमर उजाला ने 12 जून के अंक में इस घोटाले का सबसे पहले खुलासा किया। आनन-फानन में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित हुई। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर शासन ने अभियंता संजय कुमार, कैशियर अजीत कुमार एवं लेखाधिकारी सतीश प्रजापति समेत इंद्रजीत सिंह मेसर्स कामाक्षी सप्लायर्स, अभिषेक राठौर मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन, अखिलेश कुमार तिवारी एवं रामनरेश तिवारी मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन, रोहित माटा मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन, जानकी प्रसाद मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज एवं बाबूप्रसाद तिवारी मेसर्स बाबू प्रसाद तिवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। 26 नवंबर को एक्सईएन उमेश कुमार ने नवाबाद थाने में आरोपियों के खिलाफ तहरीर दी लेकिन, सरकारी महकमे में घोटाला उजागर होने के बावजूद पुलिस ने जांच के नाम पर तहरीर दबा दी। करीब 55 दिनों की टाल-मटोल के बाद आखिरकार आज सभी आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 406 एवं 409 के तहत मामला दर्ज किया। नवाबाद इंस्पेक्टर के मुताबिक मामले की विवेचना कराई जा रही है।
लेटलतीफी के पीछे राजनीतिक दबाव की चर्चा
शासन के निर्देश के बावजूद एफआईआर दर्ज करने में लेटलतीफी के पीछे राजनीतिक दबाव की भी चर्चा तेजी से चल रही है। विभागीय जानकारों के मुताबिक आरोपित फर्मों में गहरे राजनीतिक ताल्लुक रखने वाले लोग भी हैं। इनके से एक के गहरे संबंध देश की सबसे बड़ी पंचायत के सदस्य से बताए जा रहे। राजनीतिक दबाव की वजह से पुलिस मामले को लगातार टाल रही थी लेकिन, समाचार पत्रों में लगातार छपने की वजह से मामला तूल पकड़ता गया। आखिरकार पुलिस को मामला दर्ज करने को मजबूर होना पड़ा।
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