झांसी। सिंचाई विभाग में 77.35 लाख रुपये का घपला उजागर होने के बाद अब पुलिस महकमा पूरे मामले को दबाने में जुटा है। तत्कालीन अधिशासी अभियंता समेत नौ के खिलाफ दो माह पहले तहरीर दी गई थी लेकिन, पुलिस एफआईआर दर्ज करने के बजाए पहले जांच करने के नाम पर मामले की लीपापोती में जुट गई है। इस घोटाले का खुलासा अमर उजाला ने सबसे पहले किया था।
बेतवा प्रखंड के तत्कालीन एक्सईएन संजय कुमार ने पिछले सीजन में नहरों की सफाई एवं मरम्मत कार्य में विभिन्न फर्मों के बीच 77.35 लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद विभागीय जांच आरंभ हुई। इसमें एक्सईएन संजय कुमार समेत कैशियर अजीत कुमार, खंडीय लेखाधिकारी सतीश प्रजापति की मदद से बिना एग्रीमेंट किए छह फर्मों के बीच अनियमित तरीके से 77.35 लाख रुपये बांटने की पुष्टि हुई। जांच रिपोर्ट के आधार पर उपसचिव, अशोक कुमार श्रीवास्तव ने आरोपियों को निलंबित करते हुए सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बाद 26 नवंबर को एक्सईएन बेतवा उमेश कुमार ने नवाबाद थाने में तहरीर देने के साथ ही एसएसपी दिनेश कुमार पी को पत्र भेजा लेकिन, दो माह बीत जाने के बावजूद पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तक दर्ज नहीं की।
इनके खिलाफ दी गई है तहरीर
सिंचाई विभाग की ओर से दी गई तहरीर में तत्कालीन एक्सईएन संजय कुमार, अजीत कुमार, सतीश प्रजापति, मां कामाक्षी सप्लायर्स के इंद्रजीत सिंह, मेसर्स शब्द कंस्ट्रक्शन के अभिषेक राठौर, मेसर्स अनुज कंस्ट्रक्शन के अखिलेश कुमार एवं रामनरेश तिवारी, मेसर्स रोहित कंस्ट्रक्शन के रोहित माटा, मेसर्स जेपी इंटरप्राइजेज के जानकी प्रसाद गौतम एवं मेसर्स बाबू प्रसाद तिवारी का नाम शामिल किया गया है।
इस मामले की पुलिस अभी जांच कर रही है। जांच पूरी होते ही मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी।
- राहुल मिठास, प्रभारी एसएसपी