झांसी। जिले में पेयजल एवं सिंचाई की समस्या दूर करने के लिए तीन करोड़ रुपये जारी किए थे। इस राशि से 40 चेकडैम का निर्माण और 30 तालाबों को गहरा किया जाना था। लेकिन टेंडर घोटाले के चलते दोनों काम अटक गए। बजट की कमी होने से पेयजल एवं सिंचाई से जुड़ी योजनाएं शुरू नहीं हो सकीं।
साल 2019 में केंद्र सरकार ने बुंदेखलंड पैकेज के तीसरे चरण में झांसी को तीस करोड़ दिए थे। इससे 40 चेकडैम का निर्माण एवं 30 तालाबों को गहरा कराना था। इनमें कुरैचा, गुढ़ा, नोटा, लठेसरा, खिसनी, सरवां, डगरवाहा, अठौदना, बघौरा, दुरखरू, ककरबई, धनौरा, ठर्रो, लकारा, बसरिया, धमना, बसरिया, धौर्रा, वीरा, बिजरवारा, पूछ, शहजहांपुर, तालोड, बिठरी, पच्चरगढ़, फुलखिरीया, काडोर, बरहेटा, रानापुरा, कछीयामऊ, पसौरा, सुजवा एवं लकरा में चेकडैम बनाए जाने के लिए चयनित किए गए। जबकि घुराट, सिकार, सिद्घेश्वर, यारा तालाब, भुजरिया, पुतनीया बंधा, अशोकर, बड़ा तालाब, भमौरा, हनुमान मंदिर तालाब, सेमरी, शिव मंदिर तालाब, बुखारा, कुगा तालाब, फुटा तालाब, आदर्श तालाब, पलरा में तालाबों को गहरा करना था। काम शुरू होने से पहले तत्कालीन एक्सईएन की सांठगाठ से करोड़ों के टेंडर पूल कर लिए गए।
तत्कालीन सीडीओ की जांच में घोटाले की पुष्टि हो गई। गड़बड़ी के चलते काम नहीं हुआ और पिछले वर्ष फरवरी में शासन को पूरा पैसा वापस कर देना पड़ा। अब सरकार इस पैसों को दुबारा वापस करने को राजी नहीं दिखती। काफी जद्दोजहद के बाद शासन ने एक साल बाद किसी तरह पिछले दिनों चेकडैम के लिए 2.12 करोड़, तालाब को 2.54 करोड़ एवं कूप निर्माण के लिए 2.11 करोड़ रुपये जारी किए गए। शेष रकम को लेकर अफसर भी चुप्पी साधे हुए हैं।
निलंबित हो चुके तत्कालीन एक्सईएन
इस बहुचर्चित घोटाले के प्रकाश में आने के बाद तत्कालीन अधिशासी अभियंता को निलंबित कर दिया गया। जबकि 36 ठेकेदार ब्लैक लिस्ट कर दिए गए। ब्लैक लिस्टेड ठेकेदारों को अभी तक लघु सिंचाई के कार्यों से बाहर रखा गया है।