संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। रेशम का उत्पादन बढ़ाने में रेशम सखियों का सहयोग लिया जाएगा। इसके लिए जल्द ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की योजना से समूह की महिलाओं को जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।
रेशम विभाग के अधिकारी एके राव ने बताया कि मऊरानीपुर में ग्राम समाज की 27 एकड़ जमीन पर रेशम का उत्पादन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि रेशम का दायरा और बढ़ाने के लिए अब रेशम सखियां बनाई जाएंगी। समूह की महिलाओं को इस योजना से जोड़कर उन्हें रेशम उत्पादन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण के बाद उन्हें क्षेत्र में रेशम का अधिकाधिक उत्पादन करने के काबिल बनाने के साथ ही किसानों तक विभाग की योजनाओं को पहुंचाकर उन्हें कृषि आधारित उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित करेंगी। बता दें कि रेशम उत्पादन कार्य कृषि आधारित व्यवसायिक खेती है, जिससे अन्य पारंपरिक फसलों से अधिक आय प्राप्त होती है।
रेशम धागा रेशम कीट की ओर से उत्पादित कोकून से बनाया जाता है। रेशम कीट भोज्य पत्तियों को खाकर अपने लार से शरीर के चारों तरफ सुरक्षा आवरण बनाकर कोकून उत्पादित करते हैं। यह भोज्य पत्तियां शहतूती, टसर/अर्जुन, एरी/ अरंडी की होती है। उत्पादित रेशम के प्रकार का नामकरण कर शहतूती, टसर एवं एरी सिल्क कहा जाता है। रेशम कीट अंडों से 8-10 दिन में शिशु कीट बनाए जाने की प्रक्रिया को चाकी कहते हैं। रेशम धागा बनाए जाने के लिए इस कोकून को सुखाया/ उबाला जाता है। यदि यह नहीं किया जाता है तो रेशम कीट का प्यूपा लगभग 10 दिनों में मॉथ के रूप में कोकून में छेदकर बाहर आ जाता है।