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ग्रीन सिगनल न मिलने से घंटों थमे रहे श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेनों के पहिये

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ग्रीन सिगनल न मिलने के कारण शुक्रवार को भीमसेन स्टेशन से कानपुर की तरफ बढ़ रहीं श्रमिक गाड़ियों के पहिये घंटों थमे रहे। ट्रेनें अलग- अलग स्टेशनों पर खड़ी रहीं। इससे गाड़ियों में बैठे लोग गर्मी, भूख- प्यास से बेहाल रहे। शुक्रवार को दक्षिण भारत, महाराष्ट्र, गुजरात के स्टेशनों से आईं 50 से अधिक श्रमिक एक्सप्रेस गाड़ियों को कानपुर, लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर की तरफ गुजारा गया था। कानपुर में ट्रेनों की आवाजाही इतनी ज्यादा थी कि झांसी से कानपुर की तरफ बढ़ रही गाड़ियों को भीमसेन स्टेशन के आगे घंटों बाद ग्रीन सिगनल मिल रहा था। इस कारण श्रमिक एक्सप्रेस गाड़ियां झांसी, बिजौली, ललितपुर, कालपी, उरई, एट, भुआ, पिरौना, एरच, मोंठ, नंदखास, चिरगांव, पारीछा, गढ़मऊ, मुस्तरा व भीमसेन स्टेशनों पर खड़ी रहीं। ट्रेनें पटरियों पर रेंगती रहीं। एक ट्रेन को झांसी से कानपुर तक की 200 किलोमीटर दूरी को तय करने में सात से आठ घंटे लग गए। दिन भर यह सिलसिला बना रहा। वहीं, ट्रेनों में सवार मजदूर व कामगार भूख प्यास से बेहाल रहे। जहां भी ट्रेन रुकी, यात्री ट्रेन से उतरकर आसपास क्षेत्रों में खाना और पानी की मदद मांगते रहे। पुलिया नंबर नौ पर मदद के लिए बढ़े लोग कई श्रमिक एक्सप्रेस गाड़ियों को झांसी स्टेशन पर प्लेटफार्म खाली न होने की स्थिति में पुलिया नंबर आउटर पर रोका जाता है। जो भी ट्रेनें आउटर पर रुकती हैं, उनमें सवार यात्रियों की मदद के लिए पुलिया नंबर नौ के लोग मदद के लिए आगे आ रहे हैं। यहां के लोग सवारियों को खाने व पीने का पानी देते हैं।
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