महानगर से प्रतिदिन उरई, ललितपुर, तालबेहट, महोबा, मऊरानीपुर, ग्वालियर के लिए एक हजार से अधिक दैनिक यात्री नौकरी पर जाने के लिए ट्रेन में सफर करते थे। लॉकडाउन के चलते ऐसी किसी भी ट्रेन व बसों का संचालन नहीं हो रहा है जिससे वे अपने कार्यस्थल पर पहुंच सकें। ऐसे में दैनिक यात्री जोखिम उठाकर प्रतिदिन 100 किलोमीटर से अधिक दूरी बाइक से तय कर रहे हैं। नंदनपुरा में रहने वाले अनिल कुमार उरई के एक विद्यालय मेें अध्यापक हैं। उनका कहना है कि वे झांसी लखनऊ इंटरसिटी से प्रतिदिन उरई जाते थे, लेकिन अभी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए प्रतिदिन बाइक से आना जाना पड़ रहा है। ऐसे में अगर प्रशासन उनको झांसी में रहकर काम करने की अनुमति प्रदान कर दें तो वे बेहतर काम कर सकते हैं। आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। शिवाजी नगर निवासी अजय सिंह ने बताया कि वे ललितपुर में एक कंपनी के लिए काम करते हैं। साबरमती या कुशीनगर एक्सप्रेस से ललितपुर आना जाना होता था, लेकिन ट्रेनों का संचालन बंद होने के कारण वे बाइक से काम पर जा रहे हैं। उनका कहना है कि एक जून से जो ट्रेनें चलाईं जा रही हैं उनमें अगर आधी बोगी भी दैनिक यात्रियों के लिए आरक्षित कर दी जाए, तो उनकी काफी हद तक समस्या हल हो जाएगा। दरअसल, तीसरे चरण के बाद सरकारी व अधिकांश निजी ऑफिस खुल गए हैं। मगर ट्रेनों व बसों का संचालन नियमित रूप से शुरू न होने के कारण दैनिक यात्री बेहद परेशान हो रहे हैं। लॉकडाउन में संबंधित जगह पर उनको कोई किराए का मकान भी नहीं दे रहा है, ताकि उनको अप डाउन न करना पड़ा।