झांसी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो अधिनियम समेत बलात्कार) फरीदा बेगम की अदालत ने नाबालिग के साथ दुष्कर्म का आरोप सिद्ध होने पर पीड़िता के पिता के दोस्त को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने दस साल पुराने मामले में फैसला सुनाया।
विशेष लोक अभियोजक चंद्रप्रकाश शर्मा ने बताया कि एक व्यक्ति ने चिरगांव थाने में 11 मार्च 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें बताया था कि वह एक रेस्टोरेंट में काम करता है। उसके साथ दतिया के थाना सिविल लाइन के ग्राम रिछारा निवासी संदीप जाटव भी काम करता था। दोस्ती की वजह से उसका घर आना-जाना था। चार मार्च 2013 को उसकी 15 साल की पुत्री बाजार सब्जी लेने गई थी। इसी दरम्यान संदीप जाटव बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ ले गया था। पुत्री को उसके साथ जाते कुछ लोगों ने देखा भी था। काफी खोजबीन के बाद भी पुत्री का पता नहीं चल पा रहा है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर नाबालिग की बरामदगी कर ली थी। मामले की विवेचना में दुष्कर्म की धारा भी बढ़ा दी गई थी। इसके बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद दुष्कर्म का आरोप सिद्ध होने पर अभियुक्त संदीप जाटव को 10 साल के कारावास की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया, जिसकी अदायगी न करने पर अभियुक्त को छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई गई।