झांसी। आरक्षण के ट्रिपल टेस्ट फार्मूला लागू होने पर महापौर समेत नगर पालिका अध्यक्ष एवं नगर पंचायत अध्यक्ष के मौजूदा आरक्षण में उलट फेर होने की आशंका है। प्रस्तावित आरक्षण में जनपद में महापौर समेत निकाय अध्यक्ष के कुल 13 पदों में 11 सीटें आरक्षित हो गईं। इनमें अनुसूचित जाति को सर्वाधिक 10 में से आठ सीटें आरक्षित हो गईं जबकि सामान्य को दो एवं पिछड़ा वर्ग को महज एक सीट ही आरक्षित हुई।
नगर निकाय चुनाव के लिए 2 दिसंबर को महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष एवं नगर पंचायत अध्यक्ष का अनंतिम आरक्षण तय किया गया था। इसमें पूरे प्रदेश को एक यूनिट मानकर अध्यक्ष पदों का आरक्षण कर दिया लेकिन, इसको लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। इस फार्मूले के चलते नगर निगम के महापौर समेत नगर पालिका अध्यक्ष के 6 सीटों में 3 सीट एवं नगर पंचायत की 7 सीटों में 6 सीटें अनुसूचित जाति कोटे में आरक्षित हो गईं। इस तरह जनपद की 13 सीटों में 10 सीटें विभिन्न कोटे में आरक्षित हो गईं जबकि आरक्षण नियमों में पचास फीसदी से अधिक आरक्षण किया जा सकता है। इसी वजह से प्रत्येक जनपद को एक यूनिट मानकर सीटोें को आरक्षित किए जाने की मांग चल रही है। अगर आरक्षण के ट्रिपल टेस्ट जनपद वार आरक्षण तय होने का फार्मूला लागू हुआ तब अनंतिम आरक्षण में सात निकायों का आरक्षण बदलने की संभावना है। इससे महापौर पद पर भी उलट फेर होगा।
विभिन्न वर्गों को यह सीटें आरक्षित हुई थीं
महापौर अनुसूचित जाति में आरक्षित होने के अलावा नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के लिए मऊरानीपुर (अनुसूचित जाति महिला) गुरसराय (अनुसूचित जाति) समथर. (अनुसूचित जाति) चिरगांव .(अन्य पिछड़ा वर्ग महिला) बरुआसागर. (अनारक्षित) जबकि नगर पंचायत अध्यक्षों की अनंतिम सूची
मोंठ. (अनुसूचित जाति) बड़ागांव. (महिला) एरच. (अनुसूचित जाति) रानीपुर. (अनुसूचित जाति महिला) कटेरा. (अनुसूचित जाति महिला) गरौठा. (अनुसूचित जाति) टोड़ी फतेहपुर. (अनुसूचित जाति) समेत अन्य शामिल हैं।