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Jhansi News: मोटे अनाज का हब रहा भारत पर निर्यात में पीछे

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झांसी। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय मोटे अनाज वर्ष 2023 पूरी भागीदारी से मनाने का संकल्प लिया गया। कुलपति प्रो. अशोक कुमार सिंह ने कहा कि भारत मोटे अनाज का हब रहा है। मगर निर्यात में काफी पीछे है। इसके लिए मोटे अनाजों का मूल्य संवर्धन जरूरी है। इसके लिए किसानों को समूह बनाकर इस क्षेत्र में काम करना होगा।
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उन्होंने कहा कि मोटे अनाजों का प्रसंस्करण एक कठिन कार्य है और विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को इस पर विशेष कार्य करना होगा। विश्वविद्यालय अभी मोटे अनाज की सीड हब परियोजना के जरिए इस क्षेत्र में बीज की उपलब्धता किसानों व राज्य सरकारों को सुनिश्चित कर रहा है। मोटे अनाजों में पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, जिस कारण जीवनशैली रोग से ग्रस्त लोगों के बीच इसकी मांग काफी है। कार्यक्रम में कुलाधिपति डॉ. पंजाब सिंह ने भी अंतरराष्ट्रीय मोटे अनाज वर्ष 2023 पर प्रकाश डाला। साथ ही दतिया में बन रहे पशु महाविद्यालय एवं मत्स्य महाविद्यालय का दौरा किया। विश्वविद्यालय में प्रक्षेत्र भ्रमण, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, उद्यान विभाग आदि का निरीक्षण किया। साथ ही विश्वविद्यालय में चलने वाले 15 सूत्रीय कार्यक्रमों का लोकार्पण किया। उसमें शोध, बीजोत्पादन, प्रक्षेत्र प्रसार, प्रसार साहित्य प्रकाश आदि कार्य प्रमुख हैं। कार्यक्रम में ऑनलाइन जुड़े भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय कदन्न अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. एस संगप्पा, डॉ. एसके चतुर्वेदी ने विचार व्यक्त किए। इस दौरान डॉ. एआर शर्मा, डॉ. एसएस सिंह, डॉ. मुकेश श्रीवास्तव, डॉ. एसएस कुशवाहा मौजूद रहे।
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