झांसी। जिला एवं सत्र न्यायालय द्वारा साल 2021 में 20 मुकदमों में दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। इसके अलावा 103 अन्य मुकदमों में भी सजा सुनाई गई। जबकि, अलग-अलग मुकदमों में अभियुक्तों द्वारा दाखिल की गईं जमानत की 802 अर्जियों को नामंजूर किया गया।
अपराध के नियंत्रण में सजा की अहम भूमिका होती है। अपराधियों को जेल में रहकर अच्छा इंसान बनने का मौका मिलता है। जबकि, अपराधी को मिली सजा से सबक लेकर समाज के अन्य लोग अपराध से दूरी बना लेते हैं। बीते साल कोरोना काल की विषम परिस्थितियों के बाद भी जिला एवं सत्र न्यायालय में कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अनवरत रूप से न्यायिक कार्य जारी रहा। जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) मृदुलकांत श्रीवास्तव ने बताया कि बीते एक साल में न्यायालय की ओर से हत्या के 20 मुकदमों में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जबकि, दहेज हत्या के 15, गैंगस्टर के 15, डकैती /लूट के सात, दुष्कर्म के 18, पॉक्सो के 16 तथा अन्य अपराधों (धारा 307, 308, 364 आदि) के 42 मुकदमों में दोषियों को सजा सुनाई गई।
इसके अलावा हत्या के मुकदमों के अभियुक्तों के 68, दहेज हत्या के 57, गैंगस्टर के 192, डकैती /लूट के 89, दुष्कर्म के 85, पॉक्सो के 128 तथा अन्य मुकदमों के 175 जमानत अर्जी न्यायालय द्वारा नामंजूर की गईं।